भोपाल
– एमपी में रोजाना 190 लोग हो रहे सायबर ठगी का शिकार
– जालसाज नए-नए तरीकों से कर रहे हैं सेंधमारी
भोपाल। नेटबैंकिंग से जुड़ने के और एप और मोबाइल से जुडने के बाद जहॉ 24 घंटो में किसी भी समय पर रकम का ट्रांसफर करना काफी आसान और सुविधाजनक हो गया है। वहीं साइबर ठगी के मामले भी लगातार बढ़े हैं। आंकड़ो पर नजर डाली जाये तो प्रदेश में हर घंटे औसतन 8 साइबर क्राइम के प्रकरण दर्ज हो रहे हैं। और लगभग 190 लोग रोजाना साइबर ठगो का शिकार बन कर अपनी रकम गंवा रहे हैं। 2025 में पहले छह महीनों में ही कुल 34021 साइबर अपराध के मामले सामने आए हैं, जबकि यह आंकड़ा 2021 के मुकाबले कई गुना व्यादा है, जब पूरे साल में सिर्फ 13768 मामले दर्ज हुए थे। साल 2021 से 2025 तक का साइबर ठगी का ग्राफ लगातार बढ़ता ही गया है। जानकारी के मुताबिक इस तरह के साल 2022 में 26053, साल 2023 में 52846 और साल 2024 में 68,578 मामले सामने आए थे। वहीं 2025 में जनवरी से जून माह तक ही 34,021 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जो साल के अंत के 70 हजार के पास पहुचं सकती हैं।
– महानगरों से लेकर छोटे कस्बे तक ठगो के राडार पर
फिशिंग, ओटीपी स्कैम, फर्जी जॉब ऑफर, शेयर मार्केट, डिजिटल अरेस्ट मुख्य हथियार
सायबर जालसाज लोगो को जाल में फंसाने के लिये अधिकतर फिशिंग, ओटीपी स्कैम, फर्जी जॉब ऑफर, शेवर मार्केट, निवेश घोटाले, डिजिटल अरेस्ट और सोशल मीडिया पर होने वाले अन्य फर्जीवाड़ों से जुड़े तरीको का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस के अनुसार इस तरह के मामले प्रदेश के महानगरों भोपाल-इंदौर से लेकर छोटे कस्बों तक तेजी से सामने आ रहे हैं।
– जॉच अधिकारियो की कमी से जुझ रहा विभाग
सूत्रो की मानी जाये तो सायबर ठगी के बढ़ते आंकड़ो के बीच पुलिस विभाग के लिये सबसे चिंताजनक बात यह है, कि राज्य साइबर सेल में इस तरह के अपराधों की जांच करने वाले ट्रेंड अधिकारियो की संख्या कम हैं। स्टेट साइबर सेल के साथ ही जिलों की साइबर रोल में भी केवल डिजिटल और साइबर स्कैम की जांच करने वाले अफसरों की संख्या 500 से भी कम है। स्टाफ की कमी के कारण अधिकारी दबाव में है। ऐसे प्रकरणो में समस्या उस समय और बढ़ जाती है, जब ठगी को अंजाम देने वाला गिरोह अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय होता है। ऐसे में जहॉ उन्हें ट्रैस करना काफी मुश्किल भरा हो जाता है।
