नई दिल्ली
‘अल-नीनो’ बढ़ाएगा किसानों की चिंता
नई दिल्ली (BIG BREAKING): मौसम विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों ने वर्ष 2026 के मानसून को लेकर शुरुआती पूर्वानुमान जारी कर दिया है। इस बार मानसून अपनी निर्धारित तिथि से पहले आ सकता है, लेकिन ‘अल-नीनो’ के प्रभाव के कारण कुल बारिश सामान्य से कम (92%) रहने की आशंका है।
मानसून का आगमन:
केरल में मई के अंत तक दस्तक, भीषण गर्मी और तिब्बत के पठार के तेजी से तपने के कारण मौसमी सिस्टम मानसून के अनुकूल बन रहा है। अनुमान के अनुसार:
अंडमान निकोबार: 18 से 25 मई के बीच आगमन।
केरल तट: 25 से 29 मई के बीच पहुंचने की संभावना।
विशेषज्ञों का कहना है कि लैंड एरिया में बढ़ता तापमान मानसून को जल्दी खींचने में मदद कर रहा है।
अल-नीनो का साया: क्या होगा असर?
प्रशांत महासागर में अल-नीनो (El Niño) की स्थिति मजबूत हो रही है, जिससे बारिश के वितरण पर बुरा असर पड़ेगा। इसकी मुख्य चुनौतियाँ निम्नलिखित होंगी:
1. कम बारिश: मौसम विभाग ने इस साल केवल 92% बारिश का अनुमान लगाया है।
2. मानसून ब्रेक: बारिश के बीच लंबा अंतराल (12 से 14 दिन) आ सकता है।
3. असमान वितरण: एक साथ भारी बारिश के बाद लंबे समय तक सूखा रहने की संभावना है।
“मई से जुलाई के बीच अल-नीनो सक्रिय हो रहा है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ना चिंता का विषय है।” — डॉ. एस.एन. सुनील पांडे, मौसम वैज्ञानिक
किसानों के लिए बढ़ेगी परेशानी
मानसून में अनिश्चितता और ‘मानसून ब्रेक’ के कारण खेती पर सीधा असर पड़ेगा। बारिश न होने से न केवल फसलों को नुकसान होगा, बल्कि गर्मी का सीजन भी लंबा खिंच सकता है। मई के दौरान तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि अभी के संकेत कम बारिश की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान मॉडल में थोड़ी अनिश्चितता बनी हुई है। मई के दूसरे पखवाड़े में जारी होने वाला अगला अपडेट अधिक सटीक और स्पष्ट तस्वीर पेश करेगा।
