डबरा (ग्वालियर)।
डोल ग्यारस (परिवर्तिनी एकादशी) के पावन अवसर पर डबरा नगर पूरी तरह भक्ति, आस्था और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया। वर्ष में केवल एक बार आने वाले इस पावन पर्व पर शहर के ऐतिहासिक ठाकुर बाबा मंदिर, रामलला मंदिर, और मानस मंडल मंदिर सहित विभिन्न देवालयों से भगवान के विमान (डोल) एक साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में निकले।
कंधों पर उठाकर डोल निकालने की परंपरा
ठाकुर बाबा मंदिर के पुजारी रामहुजूर बाबा जी ने बताया कि दशकों से चली आ रही परंपरा के अनुसार श्रद्धालु ठाकुर जी के विमान को अपने कंधों पर उठाकर नगर भ्रमण कराते हैं। इस बार भी जैसे ही ठाकुर जी के विमान मंदिर के प्रांगण से बाहर आए, श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों की थाप, शंखध्वनि, झालरों की झनकार और भजनों की मधुर धुनों पर नाचते-गाते श्रद्धालु जुलूस के रूप में आगे बढ़ते रहे।
मुख्य मार्गों पर पुष्प वर्षा और भव्य आरती
नगर के विभिन्न मंदिरों से निकले डोल एक साथ एकत्रित होकर मुख्य मार्गों—सदर बाजार, जवाहर गंज, और मुख्य चौराहे से होते हुए गुजरे। यात्रा के दौरान जगह-जगह स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने मंच बनाकर पुष्प वर्षा की और ठाकुर जी की आरती उतारी। श्रद्धालुओं ने भगवान को माखन-मिश्री और फल-फूल का भोग लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
जल विहार के बाद महाआरती के साथ समापन
नगर भ्रमण के उपरांत परंपरा अनुसार ठाकुर जी के विग्रहों को जल विहार कराया गया और उन्हें विधि-विधान से स्नान कराया गया। इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना और भव्य महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ भाग लिया। महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया और सभी विग्रहों को सम्मानपूर्वक पुनः उनके मूल मंदिरों में विराजमान कराया गया।
सुरक्षा और जनसैलाब
आस्था के इस महाकुंभ में शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भीड़ और यातायात को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस व प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे शोभायात्रा शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न हुई।
