नई दिल्ली
नेवी के ऑर्डर में हो सकती है कई साल की देरी
कर्मचारियों पर बढ़ा काम का दबाव, मैनेजमेंट पर सवाल; 23,000 करोड़ के बड़े ऑर्डर की डिलीवरी लटकने की आशंका
नई दिल्ली (NEWS UPDATE):भारत की अत्याधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने वाली कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस इन दिनों आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है। पिछले कुछ महीनों में हुए बड़े पैमाने पर ट्रांसफर (मास ट्रांसफर) के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है, जिसका सीधा असर मिसाइल उत्पादन पर पड़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों पर काम का दबाव काफी बढ़ गया है और मैनेजमेंट स्तर पर स्थिति को प्रभावी तरीके से संभालने में कमी देखी जा रही है। इसका नतीजा यह हुआ है कि ब्रह्मोस मिसाइलों का प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
नेवी को भेजा देरी का संकेत
ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने भारतीय नौसेना को एक पत्र लिखकर मिसाइलों की आपूर्ति में संभावित देरी की जानकारी दी है। गौरतलब है कि नौसेना ने कुछ साल पहले ही कंपनी को करीब 23,000 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर दिया था। अब इस ऑर्डर की डिलीवरी में कई वर्षों की देरी की आशंका जताई जा रही है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी मांग
ब्रह्मोस मिसाइल ने हाल के सैन्य अभियानों में अपनी सटीकता और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता से दुनिया का ध्यान खींचा है। इसके चलते इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई देशों ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन में गिरावट के पीछे आंतरिक प्रबंधन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ वैश्विक रणनीतिक दबाव भी एक कारण हो सकता है। कुछ देशों की ओर से भारत पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि ब्रह्मोस का निर्यात सीमित रखा जा सके।
स्थिति सुधारने की चुनौती
ऐसे में ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर उत्पादन को पटरी पर लाना है, ताकि भारतीय सेना और संभावित विदेशी ग्राहकों की जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सके।
