वॉशिंगटन
शांति वार्ता की अटकलों के बीच शक्ति प्रदर्शन ,USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश की तैनाती से बढ़ी रणनीतिक सक्रियता
सीजफायर टूटने पर होर्मुज में हमले की तैयारी
वॉशिंगटन (IRAN AMERICA WAR UPDATE)। ईरान के साथ संभावित दूसरे दौर की शांति वार्ता के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया है। अमेरिकी नौसेना ने एक साथ तीन एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं, जो पिछले 23 वर्षों में इस क्षेत्र में सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश भी अब क्षेत्र में पहुंच गया है। 2009 में कमीशन किया गया यह निमित्ज़-क्लास कैरियर लगभग 1,000 फीट लंबा, 100,000 टन वजनी है और 80 से अधिक लड़ाकू विमान ले जाने में सक्षम है। यह दो परमाणु रिएक्टरों से संचालित होता है और इसमें करीब 5,500 नौसैनिक और एयर क्रू तैनात रहते हैं।
इस तैनाती को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख दिखाया है। व्हाइट हाउस में उन्होंने ईरान के साथ युद्ध खत्म होने की समयसीमा बताने से इनकार करते हुए कहा, “मुझ पर जल्दबाजी मत करो।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। अमेरिकी नौसेना के रिटायर्ड कैप्टन कार्ल शूस्टर के मुताबिक, तीसरे कैरियर की मौजूदगी ही ईरान के लिए एक मजबूत संदेश है कि यदि वार्ता अमेरिका की शर्तों पर आगे नहीं बढ़ी, तो और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, अगर मौजूदा युद्धविराम टूटता है तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी ठिकानों पर हमले की तैयारी कर रहा है। इन योजनाओं में ईरान के तेज हमलावर जहाजों, माइन बिछाने वाले पोतों और अन्य सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया जा सकता है, जिनका इस्तेमाल तेहरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर दबाव बनाने के लिए करता रहा है।
रक्षा विशेषज्ञ पीटर लेटन का कहना है कि USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश के विमान ऐसे अभियानों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, हालांकि उनके अनुसार इस मिशन के लिए क्षेत्र में पहले से मौजूद अमेरिकी वायु सेना के A-10 हमलावर विमान अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, अमेरिका की यह सैन्य तैनाती एक स्पष्ट संकेत है कि वह कूटनीति के साथ-साथ सैन्य विकल्प भी खुला रखे हुए है।
