डबरा,
डबरा(HRIDAY STAMBH);
कृषि प्रधान क्षेत्र डबरा में रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही खाद की किल्लत और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानियां चरम पर पहुंच गई हैं। धान, गेहूं, सरसों और गन्ने की खेती के लिए पहचाने जाने वाले इस अंचल में बुआई के समय डीएपी और यूरिया की भारी मांग बनी हुई है, लेकिन सोसायटियों और खाद वितरण केंद्रों पर किसानों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खाद की उपलब्धता, लंबी कतारों और समय पर आपूर्ति न मिलने से उपजे आक्रोश को शांत करने तथा कृषि संबंधी अन्य
समस्याओं का समाधान निकालने के उद्देश्य से एसडीएम नवकिरण कौर ने कृषि विभाग के आला अधिकारियों और स्थानीय कृषकों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की थी।
बैठक में किसानों की अनुपस्थिति: प्रमुख सवाल और कारण
हालांकि, प्रशासनिक दावों और इस उच्च स्तरीय पहल के बावजूद बैठक का दृश्य बेहद चौंकाने वाला रहा। विशाल कृषि क्षेत्र और हजारों की किसान आबादी वाले डबरा में बुलाई गई इस बैठक में महज चार किसान ही उपस्थित हो सके। इतने महत्वपूर्ण विषय पर बुलाई गई सरकारी बैठक में किसानों की इस नगण्य मौजूदगी ने पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सूचना तंत्र और विभागीय गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रबी फसलों की बुआई के इस नाजुक मोड़ पर जब खाद की कालाबाजारी और किल्लत को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हों, तब इस प्रकार का संवाद फ्लॉप होना क्षेत्र में गहरी चर्चा का विषय बन गया है।
अधिकारियों की चुप्पी और आगामी कदम
बैठक में किसानों के न पहुंचने को लेकर अब मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आ रहे हैं। पहला यह कि क्या प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से बैठक की पूर्व सूचना दूर-दराज़ के गांवों और खेतों में काम कर रहे वास्तविक अन्नदाताओं तक समय रहते पहुंचाई ही नहीं गई, और प्रचार-प्रसार केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रह गया? वहीं दूसरी ओर, स्थानीय किसानों का एक तबका इसे व्यवस्था के प्रति उपजी निराशा के रूप में देख रहा है। किसानों का मानना है कि बैठकों और आश्वासनों के बावजूद धरातल पर खाद वितरण व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं होता, जिससे परेशान होकर अब वे अपनी बात रखने के लिए आगे आने में भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
बैठक के दौरान उप-विभागीय अधिकारी नवकिरण कौर ने उपस्थित कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र में डीएपी और यूरिया का पारदर्शी एवं सुचारू वितरण सुनिश्चित किया जाए। हालांकि, बैठक में किसानों की बेहद कम उपस्थिति के पीछे क्या कारण रहे, इस पर प्रशासनिक स्तर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डबरा प्रशासन इस संवाद विफलता से सीख लेते हुए खाद केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था लागू कर पाएगा और हजारों किसानों को समय पर डीएपी एवं यूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर राहत पहुंचा पाएगा।

