नई दिल्ली
बोला- काम नहीं हुआ तो हाईकोर्ट के गेट पर धरना देंगे जज
दिल्ली हाईकोर्ट के पास पैदल यात्रियों की सुरक्षा का मामला, स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स लगाने में देरी पर अधिकारियों को फटकार
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के पास सड़क पार करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुरक्षा इंतजामों में देरी पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि जरूरी काम पूरा नहीं हुआ तो दोनों न्यायाधीश दिल्ली हाईकोर्ट के गेट पर धरने पर बैठ जाएंगे और काम पूरा होने तक घर नहीं लौटेंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रम बनर्जी को भी फटकार लगाते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो उन्हें भी घर नहीं जाने दिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला लोगों की जान की सुरक्षा से जुड़ा है और इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने संबंधित स्थान पर रेड लाइट सिग्नल लगवा दिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल सिग्नल लगाना पर्याप्त नहीं है। वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स जैसे अतिरिक्त इंतजाम भी जरूरी हैं। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही का अध्ययन कराने का सुझाव दिया।
‘यह लोगों की जान का सवाल है’
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रम बनर्जी ने अदालत को बताया कि रेड लाइट सिग्नल पर्याप्त है, लेकिन यदि न्यायालय को अतिरिक्त सुरक्षा उपाय जरूरी लगते हैं तो केंद्र सरकार उन्हें लागू करने के लिए तैयार है। इस पर न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह लोगों की जान का सवाल है। उन्होंने कहा कि दोनों न्यायाधीश स्वयं मौके पर जाएंगे और अधिकारियों को भी साथ चलना होगा।
2013 से लंबित है सड़क सुरक्षा का मामला
दिल्ली हाईकोर्ट के पास पैदल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी याचिका हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. राजसीकरन ने वर्ष 2013 में दायर की थी। पिछले वर्ष न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने भी इस व्यस्त सड़क पर सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने की व्यवस्था नहीं होने पर चिंता जताई थी। अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया था कि पर्याप्त ट्रैफिक सिग्नल, फुट ओवरब्रिज और अन्य सुरक्षा इंतजामों के अभाव में पैदल यात्रियों की जान जोखिम में रहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को केंद्र सरकार से दिल्ली हाईकोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पास सड़क पार करने वाले स्थानों पर स्पीड ब्रेकर तथा रंबल स्ट्रिप्स लगाने पर निर्णय लेने को कहा था। अब अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद संबंधित अधिकारियों पर सुरक्षा इंतजाम जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।

