जयारोग्य अस्पताल ग्वालियर में बेड की कमी? जमीन पर लेटने को मजबूर मरीज

ग्वालियर

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करोड़ों की लागत से बना JAH का नया ब्लॉक, लेकिन बुनियादी सुविधाएं नदारद

ग्वालियर (HRIDAY STAMBH):अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल (JAH) के 1000 बिस्तर वाले नए अस्पताल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य दावों की पोल खोल कर रख दी है।

अस्पताल परिसर में एक मरीज के जमीन पर लेटे होने की तस्वीर सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में तेजी से वायरल हो रही है, जिसने अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

1000 बिस्तर के बाद भी बेड की किल्लत?

ग्वालियर-चंबल संभाग के सबसे बड़े और आधुनिक कहे जाने वाले 1000 बिस्तर के अस्पताल को इसलिए तैयार किया गया था ताकि मरीजों को इलाज के लिए भटकना न पड़े और पर्याप्त बेड मिल सकें। लेकिन सामने आई इस नई तस्वीर ने जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है।

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि एक लाचार मरीज को बेड न मिलने के कारण या किसी अन्य अव्यवस्था की वजह से जमीन पर ही लेटना पड़ा। यह दृश्य सरकारी अस्पतालों में अत्यधिक भीड़, संसाधनों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को बयां कर रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं और प्रबंधन पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इतने बड़े सेटअप के बाद भी अगर मरीजों को बुनियादी सुविधाएं और स्ट्रेचर या बेड नहीं मिल पा रहे हैं, तो फिर करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस इमारत का क्या फायदा?

अस्पताल में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज दूर-दराज के गांवों और जिलों से इलाज के लिए आते हैं, लेकिन प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण उन्हें इस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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