इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी बोले — आचार-विचार शुद्ध हो तो ग्रह देते हैं शुभ फल

डबरा/भितरवार

डबरा

डबरा नवग्रह शक्ति पीठ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवें दिन सायंकाल वृंदावन के प्रसिद्ध युवा कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज श्री की श्रीकथा का भव्य आयोजन हुआ। महाराज श्री की भावपूर्ण कथा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से भावविभोर कर दिया।
कथा के दौरान महाराज श्री ने डबरा नवग्रह शक्ति पीठ की सराहना करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में आने वाली अनुकूलता और प्रतिकूलता ग्रहों के कारण ही आती है। जिनके ग्रह उन्हें कष्ट देते हैं, वे यहां आकर उनका समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रह किसी का अनिष्ट नहीं करते, बल्कि जब व्यक्ति का आचार, विचार और व्यवहार अनुचित हो जाता है, तभी ग्रह कष्ट का कारण बनते हैं।

महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति को सदैव अपने आचार-विचार शुद्ध और व्यवहार संयमित रखना चाहिए, तभी जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
कथा के प्रसंग में उन्होंने अपनी इच्छा भी प्रकट की कि जब यहां सभी नौ ग्रह विराजमान हैं, यदि छोटे से जगन्नाथ जी भी यहां विराजमान हो जाएं, तो इस पावन स्थल का आनंद और आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक बढ़ जाएगा।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से जयकारे लगाए और पूरा परिसर आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो गया।

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