बागेश्वर धाम बनाम विदिशा कलेक्टर: “हम एक बच्चे पर रुके, आप पांच क्यों?”—विदिशा मुखर्जी का तीखा जवाब

राज्य

विदिशा

धीरेंद्र शास्त्री के ‘ज्यादा संतान’ वाले बयान पर मचा विवाद, कलेक्टर की प्रतिक्रिया वायरल; जनसंख्या, जिम्मेदारी और समाजिक सोच पर छिड़ी बहस

 

विदिशा (BIG UPDATE)। मध्यप्रदेश में इन दिनों बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान को लेकर सियासत और समाज दोनों में तीखी बहस छिड़ गई है। इसी कड़ी में विदिशा की कलेक्टर विदिशा मुखर्जी का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने ज्यादा बच्चों को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा—“हम एक बच्चे पर ही रुक गए, आप आज की पढ़ी-लिखी पीढ़ी होकर भी पांच बच्चे कर रहे हैं?”

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, हाल ही में धीरेंद्र शास्त्री ने एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान ज्यादा संतान को लेकर अपनी बात रखी थी, जिसे लेकर अलग-अलग वर्गों में प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ लोगों ने इसे परंपरा और धर्म से जोड़ा, तो कई लोगों ने इसे मौजूदा समय में गैर-जिम्मेदाराना सोच बताया।
इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए विदिशा कलेक्टर विदिशा मुखर्जी ने जनसंख्या नियंत्रण और जिम्मेदारी का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में संसाधन सीमित हैं, ऐसे में परिवार नियोजन बेहद जरूरी है।

कलेक्टर का सख्त संदेश

कलेक्टर मुखर्जी ने साफ तौर पर कहा कि पढ़े-लिखे समाज को उदाहरण पेश करना चाहिए।
उनका कहना था कि
कम बच्चे = बेहतर परवरिश
संसाधनों का संतुलित उपयोग,बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी जताया कि ज्यादा बच्चों को बढ़ावा देना वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में सही नहीं है।

सोशल मीडिया पर मची बहस

कलेक्टर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो धड़े बन गए हैं। एक वर्ग कलेक्टर के बयान का समर्थन करते हुए इसे जागरूकता का हिस्सा बता रहा है। वहीं दूसरा वर्ग इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर आलोचना कर रहा है। कुछ यूजर्स का कहना है कि यह निजी जीवन का मामला है, जबकि कई लोगों ने जनसंख्या नियंत्रण को देश के विकास से जोड़ा।

जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश में सीमित संसाधनों के बीच संतुलित जनसंख्या बेहद जरूरी है। कम बच्चे होने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत रहती है बच्चों को बेहतर अवसर मिलते हैं देश के विकास में भी सकारात्मक असर पड़ता है

बागेश्वर धाम के बयान और विदिशा कलेक्टर की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि परंपरा और आधुनिक सोच के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। यह मुद्दा सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि समाज की सोच, जिम्मेदारी और भविष्य से जुड़ा हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *