ईरान से 6 लाख बैरल तेल लेकर आ रहा पिंग शुन जहाज अचानक चीन की तरफ मुड़ा

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नई दिल्ली

अभी तक साफ नहीं है किस भारतीय रिफाइनरी ने यह कार्गो खरीदा था
ईरान से करीब 600,000 बैरल कच्चे तेल की खेप लेकर आ रहा जहाज अचानक चीन की तरफ मुड़ गया। ये जहाज गुरुवार रात तक अरब सागर में भारत के रास्ते पर था लेकिन अब ये चीन की तरफ मुड़ गया है। इस जहाज का नाम पिंग शुन है और इसके गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद थी। तेल बाजार पर नजर रखने वाली एजेंसी ने इस कच्चे तेल के जहाज के भारत से चीन की तरफ रास्ता बदलने की पुष्टि की है।
वैश्विक व्यापार डेटा इंटेलिजेंस में रिफाइनरी और तेल बाजारों की मॉडलिंग के मैनेजर ने शुक्रवार को बताया है कि एक ईरानी कच्चे तेल का जहाज पिंग शुन जो पिछले तीन दिनों से भारत के वाडिनार की तरफ जा रहा था उसने अपने मंजिल के करीब पहुंचने से ठीक पहले अपना रास्ता बदल लिया और चीन की तरफ मुड़ गया। उन्होंने बाजार के सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि चीन की तरफ जहाज के मुड़ने के पीछे ईरानी तेल को लेकर पेमेंट की शर्तों में आया बदलाव है। अब विक्रेता 30-60 दिनों की क्रेडिट विंडो देने के बजाय पहले से ही पेमेंट की मांग कर रहे हैं यानि एडवांस पेमेंट के बाद ही तेल का खेप भेजने की बात हो रही है।
उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी कच्चे तेल के मामले में सफर के बीच में मंजिल में इस तरह के बदलाव होना कोई नई बात नहीं है लेकिन ये इस बात को उजागर करते हैं कि व्यापार के प्रवाह के लिए वित्तीय शर्तें और काउंटरपार्टी जोखिम कितने ज्यादा संवेदनशील होते जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक साफ नहीं है कि किस भारतीय रिफाइनरी ने यह कार्गो खरीदा था क्योंकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, नायरा एनर्जी और भारत पेट्रोलियम जैसी कई रिफाइनरियां वाडिनार के जरिए ही कच्चा तेल मंगाती हैं।
उन्होंने संकेत दिया है कि अगर पेमेंट से जुड़ी समस्याएं हल हो जाती हैं तो कार्गो को अभी भी वापस भारत भेजा जा सकता है, लेकिन यह घटना इस बात पर जोर देती है कि चीन के अलावा दूसरे देशों में ईरानी कच्चे तेल की सप्लाई तय करने में लॉजिस्टिक्स की तरह ही कमर्शियल शर्तें भी कितनी अहम होती जा रही हैं।

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