जहाज़ों की ठप होती आवाजाही के चलते ईंधन और खाद्य क़ीमतों में आ सकता है उछाल

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तेहरान

ईरान पर इजरायली और अमेरिकी हवाई हमलों के बाद भड़के भीषण संघर्ष ने मध्य पूर्व के सामरिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री रास्ता, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, वर्तमान में असुरक्षा के चरम दौर से गुजर रहा है। इस मार्ग से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की खबरों ने वैश्विक व्यापारिक समुदाय में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के आसपास के क्षेत्रों में जहाजों पर हमले की कम से कम 21 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
इस सैन्य टकराव का सीधा असर अब दुनिया भर की जेबों पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसने वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं के अनुसार, युद्ध के बढ़ते जोखिम के कारण जहाजों के बीमा प्रीमियम और समुद्री ईंधन की लागत में भारी उछाल आया है। अब जोखिम भरे जलमार्गों से गुजरने वाले प्रति कंटेनर पर 2 से 4 हजार डॉलर की अतिरिक्त लागत चुकानी पड़ रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के उन चुनिंदा रास्तों में से है जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। युद्ध से पहले यहाँ से प्रतिदिन करीब 140 जहाजों की आवाजाही होती थी, जो अब सिमटकर महज कुछ जहाजों तक रह गई है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह संकट केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रहेगा। यदि इस जलमार्ग पर बाधा जारी रही, तो तरलीकृत प्राकृतिक गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक व्यापारिक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह ठप हो सकती है। ईंधन और उर्वरक की कीमतों में बढ़ोत्तरी का सीधा असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य संकट पैदा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने नागरिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत आवाजाही की स्वतंत्रता एक बुनियादी सिद्धांत है और युद्धरत पक्षों को हर हाल में इसका सम्मान करना चाहिए। फिलहाल, इस समुद्री मार्ग पर व्याप्त अनिश्चितता ने पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक उथल-पुथल के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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