साहस की मिसाल गोरखपुर की दिव्या सिंह

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साइकिल से फतह किया माउंट एवरेस्ट बेस कैंप
काठमांडू से शुरू हुआ 700 किमी का कठिन सफर, भारत की पहली महिला होने का गौरव हासिल

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली दिव्या सिंह ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। दिव्या साइकिल से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप (17,560 फीट) तक पहुंचने वाली भारत की पहली और दुनिया की दूसरी महिला बन गई हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ-साथ अपने जुनून को जिंदा रखने वाली दिव्या की यह कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

चुनौतियों भरा सफर: 14 दिन और 700 किलोमीटर
दिव्या ने अपनी यह ऐतिहासिक यात्रा 16 मार्च को नेपाल की राजधानी काठमांडू से शुरू की थी। बेस कैंप तक पहुंचने में उन्हें 14 दिन का समय लगा। इस दौरान उन्होंने लगभग 700 किलोमीटर की दूरी तय की।
“मेरा जुनून साइकिलिंग और ट्रैकिंग है। सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ-साथ मैंने इसे अपना लक्ष्य बनाया और आज बेस कैंप तक पहुंचकर इसे पूरा किया।” — दिव्या सिंह

पहाड़ों की चढ़ाई केवल शारीरिक मजबूती का खेल नहीं है, बल्कि यह मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा है। दिव्या ने अपनी यात्रा के दौरान जिन मुश्किलों का सामना किया, वे रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं यात्रा के दौरान तापमान -20 से -25 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था। बेस कैंप पहुंचने वाले दिन भी तापमान -12 डिग्री सेल्सियस था। भारी बारिश और बर्फबारी के बीच साइकिल चलाना एक बड़ी चुनौती थी।  17,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से 50% कम हो जाता है, जिससे दिल की धड़कन बढ़ जाती है और सांस लेने में भारी तकलीफ होती है।

महिला सशक्तिकरण का नया चेहरा
दिव्या की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाएं भी अगर ठान लें, तो दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों को पार कर सकती हैं। उनकी यह सफलता केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के उस विजन को भी मजबूती देती है, जिसमें उन्होंने महिलाओं को एडवेंचर स्पोर्ट्स में आगे आने और खुद को सशक्त बनाने पर जोर दिया था। सोशल मीडिया पर दिव्या की कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसे देखकर देश की अन्य युवतियां भी अपने सपनों को उड़ान देने के लिए प्रेरित हो रही हैं।

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