नई दिल्ली
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज (12 मार्च 2026) नई दिल्ली में केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में प्रदेश से जुड़ी लंबित योजनाओं और विकास कार्यों पर विस्तृत चर्चा की। इन बैठकों में कृषि, ग्रामीण विकास, वित्त और जल संसाधन से जुड़े कई अहम विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक के दौरान कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न कार्यों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राज्य में संचालित भावांतर योजना को सफल बताते हुए सरसों के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया, जिस पर सकारात्मक आश्वासन मिला।
– दाल प्रसंस्करण और खरीद पर चर्चा
कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अरहर (तुअर) दाल के प्रसंस्करण के लिए राज्य में लगभग 55 नई यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। साथ ही राज्य में उत्पादित दाल की सरकारी खरीद को लेकर भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया गया।
– ग्रामीण विकास योजनाओं को गति
बैठकों में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत शेष आवासों के कोटे को प्राप्त करने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज करने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण योजना के अंतर्गत गांवों में सड़कों के कोटे के विस्तार पर भी विचार किया गया।
– किसान कल्याण वर्ष की जानकारी
मुख्यमंत्री ने राज्य में “किसान कल्याण वर्ष” के तहत 17 विभागों को जोड़कर किसानों के हित में चलाए जा रहे विशेष अभियान की भी जानकारी दी।
– वित्तीय प्रबंधन और शहरी योजनाएं
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के साथ वित्तीय प्रबंधन, जल जीवन मिशन और नगरीय आपूर्ति निगम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने 31 मार्च से पहले योजनाओं के लक्ष्यों को पूरा करने और राज्य के लिए निर्धारित कोटे को सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
– जल परियोजनाओं की समीक्षा
जल संसाधनों से जुड़े विषयों पर मुख्यमंत्री ने सीआर पाटीलके साथ केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती–कालीसिंध-चंबल परियोजना की समीक्षा की। साथ ही अंतरराज्यीय जल समझौतों की पुनर्समीक्षा कर भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई। सीएम रेखा ने बताया कि एकल जल परियोजना और समूह नल–जल योजना के माध्यम से हर घर तक नल से जल पहुंचाने की योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही जल परियोजनाओं से जुड़े लंबित बिलों के भुगतान का मुद्दा भी केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया।
