अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर सुनवाई करेगा इलाहाबाद हाईकोर्ट -अगर कोर्ट से उन्हें जमानत नहीं मिलती है तो पुलिस कर सकती है गिरफ्तार

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यौन उत्पीड़न के मामले में दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। अगर हाईकोर्ट से उन्हें जमानत नहीं मिलती है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। अग्रिम जमानत अर्जी में यूपी सरकार और पांच अन्य को पक्षकार बनाया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वकीलों के जरिए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जबकि शिकायतकर्ता आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिग पीड़ित, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को पक्षकार बनाया गया है। बता दें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ झूंसी थाने में यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज है। यह मुकदमा लैंगिक अपराधों से जुड़ी 6 अन्य धाराओं में दर्ज है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ शिकायत तुलसी कुंज के आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 14 और 17 साल के दो नाबालिग लड़कों का स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में खुद स्वामी और उनके साथियों ने एक साल से ज्यादा समय तक यौन शोषण किया। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब दो नाबालिग पीड़ित माघ मेले में शिकायतकर्ता के पास आए, उन्हें अपने यौन शोषण के बारे में बताया और पुलिस सुरक्षा पाने में भी उनकी मदद मांगी। एफआईआर में शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद के दोनों शिष्यों ने उन्हें बताया कि महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान भी उनके साथ यौन शोषण हुआ था। दोनों शिष्यों से कहा गया था कि वे इसे गुरु सेवा के तौर पर लें और भविष्य में उन्हें इसका लाभ मिलेगा।
आरोप लगाए गए हैं कि दोनों नाबालिगों को आश्रम में अकेले या साथ में बिना कपड़ों के सोने के लिए मजबूर किया गया। उन्हें धमकी दी गई, और फिर रात में उनका यौन शोषण किया गया। एफआईआर में यह भी दावा किया गया है कि हाल ही में माघ मेले के दौरान भी, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नाबालिग पीड़ितों का खड़ी कार के अंदर और एक अस्थायी कैंप के अंदर भी यौन शोषण किया।

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