मंडी के बाहर संचालित दो दर्जन से अधिक दुकानों पर कार्रवाई ठप, प्रशासनिक रवैये पर उठे गंभीर सवाल

दतिया

भांडेर

नगर में कृषि उपज मंडी के बाहर नियमों को ताक पर रखकर दो दर्जन से अधिक दुकानें लंबे समय से संचालित हो रही हैं, लेकिन इस गंभीर मामले में प्रशासन की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। नियम स्पष्ट हैं कि कृषि उपज की खरीदी-बिक्री मंडी परिसर के भीतर ही की जानी चाहिए, जिससे किसानों को पारदर्शी व्यवस्था, उचित मूल्य और शासन को निर्धारित राजस्व प्राप्त हो सके। इसके बावजूद नगर में मंडी सीमा से बाहर खुलेआम व्यापार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सोनाली राजपूत द्वारा इस मामले में केवल एक दिन कार्रवाई की गई, जिसमें महज तीन दुकानों पर ही कार्यवाही कर औपचारिकता पूरी कर ली गई। इसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जबकि वास्तविकता यह है कि मंडी के बाहर नियम विरुद्ध तरीके से संचालित दुकानों की संख्या दो दर्जन से भी अधिक बताई जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि नियमों का उल्लंघन इतने बड़े स्तर पर हो रहा है तो कार्रवाई सीमित क्यों रखी गई।  किसानों का कहना है कि मंडी के बाहर हो रही खरीदी-बिक्री से उन्हें सीधा नुकसान हो रहा है। बाहर की दुकानों पर न तो सही तौल होती है और न ही पारदर्शी बोली की व्यवस्था रहती है। कई बार किसानों को मजबूरी में अपनी उपज कम दामों पर बेचनी पड़ती है। किसानों का यह भी कहना है कि मंडी के बाहर होने वाले व्यापार से वे सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, जो मंडी परिसर में व्यापार करने पर मिलती हैं। वहीं मंडी परिसर में नियमों का पालन कर लाइसेंस लेकर व्यापार करने वाले व्यापारियों में भी गहरा रोष है। उनका कहना है कि वे मंडी शुल्क, टैक्स और अन्य शासकीय नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करते हैं, जबकि मंडी के बाहर संचालित दुकानों पर न तो नियमित जांच होती है और न ही कठोर कार्रवाई। इससे ईमानदार व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और अवैध रूप से व्यापार करने वालों को अप्रत्यक्ष लाभमिल रहा है। नगर के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल एक दिन की कार्रवाई से प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। यदि वास्तव में मंडी व्यवस्था को सुदृढ़ करना है, तो मंडी के बाहर  संचालित सभी दुकानों की सूची तैयार कर निष्पक्ष और चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कार्रवाई के बाद दोबारा अवैध रूप से दुकानें संचालित न हो इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सख्ती से नियमों का पालन कराया जाए, तो न केवल किसानों को लाभ मिलेगा बल्कि शासन के राजस्व में भी वृद्धि होगी। अब नगरवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यापक कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला कागजों तक सीमित रह जाएगा। जनता को उम्मीद है कि मंडी व्यवस्था को सुधारने के लिए जल्द ही ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

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