बेटे की मौत के बाद ससुर बना पिता, विधवा बहू का कन्यादान कर रचाई शादी

राज्य

उज्जैन 

समाज के लिए पेश की अनूठी मिसाल

उज्जैन (NEWS UPDATE): जिले में सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों की एक ऐसी अनूठी मिसाल देखने को मिली है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। जिले के जैथल गांव निवासी एक परिवार ने अपने युवा बेटे के निधन के बाद अपनी विधवा बहू का दोबारा घर बसाया। ससुर ने न सिर्फ पिता की भूमिका निभाते हुए खुद अपनी बहू का कन्यादान किया, बल्कि विवाह का पूरा खर्च भी स्वयं उठाया।

कैंसर की वजह से छिन गई थीं खुशियां

जैथल गांव के निवासी दिनेश वैरागी के पुत्र कपिल वैरागी का विवाह कम उम्र में प्रियंका (निवासी विदिशा) से हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही कपिल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए। परिवार ने उनके बेहतर इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन वर्ष 2023 में कपिल जिंदगी की जंग हार गए।

पति के अचानक निधन से प्रियंका की जिंदगी में अंधेरा छा गया और उनका भविष्य अनिश्चित हो गया।

​’बहू बनाकर लाया था, बेटी बनाकर विदा करूंगा’

दुख की इस घड़ी में प्रियंका के ससुर दिनेश वैरागी और सास कैलाश बाई ने बहू के भविष्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने समाज के पुराने बंधनों को तोड़ते हुए संकल्प लिया कि वे प्रियंका का जीवन दोबारा संवारेंगे।

“हम पूरे परिवार ने मिलकर यह फैसला लिया कि प्रियंका की पूरी जिंदगी आगे पड़ी है। मैं उसे बहू बनाकर लाया था, लेकिन अब बेटी बनाकर ही सम्मानपूर्वक विदा करूंगा।”

दिनेश वैरागी, प्रियंका के ससुर

​विदिशा के गोविंद के साथ तय हुआ रिश्ता

पारिवारिक सहमति के बाद प्रियंका के लिए योग्य वर की तलाश शुरू की गई। अंततः विदिशा जिले के अटारीखेड़ी निवासी गोविंद से रिश्ता पक्का हुआ, जो वर्तमान में खंडवा में कार्यरत हैं।

दोनों पक्षों की रजामंदी के बाद भोपाल स्थित एक रिसॉर्ट में पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और सामाजिक सम्मान के साथ विवाह समारोह आयोजित किया गया।

ससुर ने निभाया पिता का फर्ज, खुद किया कन्यादान

विवाह का सबसे भावुक क्षण वह था जब दिनेश वैरागी ने पिता का स्थान लेकर प्रियंका का कन्यादान किया। शादी की तमाम तैयारियों से लेकर financial जिम्मेदारी (पूरा खर्च) तक सब कुछ ससुर ने खुद उठाया। इस दृश्य को देखकर मंडप में मौजूद रिश्तेदार और ग्रामीण भावुक हो गए।

लड़की के पिता ने जताया आभार

प्रियंका के पिता रामबाबू ने अपने समधी दिनेश वैरागी की इस पहल पर गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कोई ससुर उनकी बेटी को इतना प्यार और सम्मान देगा।

यह घटना सिर्फ एक पुनर्विवाह नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि रिश्ते केवल खून के मोहताज नहीं होते, बल्कि अपनापन और जिम्मेदारी ही सच्ची मानवता की पहचान है।

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