शिवपुरी
पर्यावरण को भारी खतरा
नरवर (HRIDAY STAMBH): सतनबाड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धमकन, शेरगढ़, भीमपुर और पचपेड़िया बीट क्षेत्र में स्थित सिंध नदी से अवैध रेत एवं बजरी उत्खनन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। जानकारी के अनुसार सिंध नदी का जलस्तर कम होते ही वन माफिया सक्रिय हो कर रेत के अवैध उत्खनन में जुट जाते हैं रात के अंधेरे के साथ-साथ मौका देख दिनदहाड़े भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से अवैध उत्खनन कर रेत का परिवहन किया जाता है।
इन क्षेत्रों में सक्रिय है रेत माफिया
धमकन बीट के ऐरावन गांव से लेकर शेरगढ़, भीमपुर बीट के टुकी गांव तथा पचपेड़िया बीट के पवा गांव तक वन क्षेत्र में स्थित सिंध नदी से बड़े पैमाने पर रेत (बजरी) का भंडार है। वन क्षेत्र में रखी रेत को हर वर्ष हजारों ट्रॉली से भरकर बेचा जाता है, जिससे शासन को राजस्व की हानि होने के साथ-साथ नदी और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाया जाता है।
ग्राम टुकी नानकपुर,बरखाडी और लेंगड़खौ से लगे हुए वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन की गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। वन क्षेत्र की सुरक्षा में लगे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई के अभाव में यह कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
सतनबाड़ा एवं नरवर क्षेत्र के वन अधिकारियों की जानकारी में यह गतिविधियां लंबे समय तक संचालित होती रहीं, लेकिन अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे वन विभाग एवं राजस्व विभाग को लाखों रुपये की राजस्व क्षति होने की बात भी स्पष्ट तौर पर देखी जा रही है।
वहीं, पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सिंध नदी से लगातार हो रहा अवैध उत्खनन नदी के प्राकृतिक स्वरूप, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हालांकि कई ग्रामीणों के द्वारा वरिष्ठ अधिकारी को संज्ञान में दिया गया है।
अब देखना यह है कि प्रशासन उक्त मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह अवैध उत्खनन का खेल हमेशा की तरह चलता रहेगा।
इनका कहना है।
मेरी जानकारी में नहीं है सिंध नदी से रेत उत्खनन का मामला बताया जा रहा है मैं मौके की जांच कराती हूं।
श्रुति राठौर वन परिक्षेत्र अधिकारी सतनबाड़ा
