उज्जैन:
जीवित पिंडदान कर त्यागे सांसारिक रिश्ते, दीक्षा के बाद बनीं ‘हर्षानंदगिरी’
उज्जैन:उज्जैन में हर्षा रिछारिया ने सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास की राह चुन ली। दीक्षा से पहले सनातन परंपरा के अनुसार उन्होंने अपना जीवित पिंडदान किया। इस अनुष्ठान में हर्षा ने प्रतीकात्मक रूप से अपने पुराने सांसारिक जीवन, रिश्तों और मोह-माया का त्याग किया।
धार्मिक विधि-विधान के साथ पिंडदान और अन्य संस्कार पूरे किए गए। इसके बाद हर्षा रिछारिया ने महामंडलेश्वर सुमिनानंद महाराज से संन्यास की दीक्षा ली। इसी क्रम में, दीक्षा के साथ ही उनका नया संन्यासी नाम हर्षानंदगिरी रखा गया। पिंडदान के बाद हर्षानंदगिरी ने संकल्प लिया कि अब उनका जीवन पूरी तरह धर्म, साधना और सेवा को समर्पित रहेगा। इस तरह हर्षा रिछारिया ने अपने सांसारिक जीवन का अंत कर आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत की है।
संन्यास ग्रहण करने के पश्चात, हर्षानंदगिरी ने संकल्प लिया कि उनका शेष जीवन धर्म, साधना और सेवा के लिए समर्पित रहेगा। इस तरह, उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग पर नई शुरुआत की।
हालांकि 2 से 3 दिन पहले उन्होंने अपने ग्लैमरस लुक में फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए थे जिसके बाद लोगों को लगा वो ग्लैमर वर्ल्ड में वापस आ गई। लेकिन आज सुबह उज्जैन के गंगा घाट में उन्होंने खुद का पिंडदान कर दिया और पूरी तरह से सन्यासी जीवन को अपना लिया है इस घटनाक्रम के बाद शहर में चर्चा का माहौल है। कुछ लोग इसे आध्यात्मिक जागृति का परिणाम मान रहे हैं, तो कुछ इसे अचानक लिया गया निर्णय बता रहे हैं। हालांकि, सनातन परंपरा में ऐसे त्याग को उच्च आध्यात्मिक कदम के रूप में देखा जाता है।
