दतिया
पूर्व मंत्री यशोधरा राजे बोलीं- ‘आत्ममंथन का समय’, पार्टी ने की बड़ी कार्रवाई
दतिया (HRIDAY STAMBH):दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा में अंदरूनी रार बढ़ गई है। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के ‘आत्ममंथन’ वाले पोस्ट से पार्टी में खलबली मच गई है। बीजेपी ने कार्रवाई करते हुए दतिया जिला संगठन को भंग कर दिया है।
मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर सियासी भूचाल आ गया है। एक तरफ जहां प्रदेश नेतृत्व हार के कारणों की समीक्षा में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से बयानबाजी कर संगठन की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। बीजेपी नेताओं की बयानबाजी से स्थिति तनावपूर्ण हो गई है और मामले की गूंज शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गई है।
यशोधरा राजे सिंधिया का पोस्ट और भाजपा में बवाल
नतीजे आने के बाद बीजेपी की वरिष्ठ नेत्री और मध्य प्रदेश सरकार की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए पार्टी को खुलकर नसीहत दे डाली। उन्होंने लिखा कि “यह आत्ममंथन का समय है।”
यशोधरा राजे के इस बयान के बाद पार्टी गलियारों में हड़कंप मच गया। उनके इस कदम को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उनके इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट हाईकमान और शीर्ष नेताओं तक पहुंचा दिया गया है।
समीक्षा समिति का गठन और बड़ा एक्शन: दतिया की पूरी टीम भंग
उपचुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने त्वरित कार्रवाई की है। पार्टी ने दतिया में हार के कारणों की जांच और भितरघातियों की पहचान के लिए दो सदस्यीय समीक्षा समिति का गठन किया है। इस समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया है।
समीक्षा समिति की शुरुआती रिपोर्ट और अनुशंसाओं के आधार पर बीजेपी ने कड़ा फैसला लेते हुए दतिया के पूरे जिला संगठन को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर भड़कीं टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष
केवल यशोधरा राजे ही नहीं, बल्कि टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा:
“जब कार्यकर्ता की जगह अधिकारी यह कहने लगें कि हमारी पहुंच ऊपर तक है, तब परिणाम विपरीत ही आते हैं।”
उनके इस बयान को स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और लालफीताशाही के खिलाफ आक्रोश के रूप में देखा जा रहा है।
