CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद में बड़ा कदम

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नई दिल्ली

CBSE Transfer News: चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला; रांची के छात्र सार्थक सिद्धांत ने खोला OSM टेंडर का राज

नई दिल्ली (NEWS UPDATE): CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है। साथ ही OSM सर्विस के टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस बीच OSM में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाने वाले 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने संसद की स्थायी समिति के सामने अपनी बात रखी।

बताया जा रहा है  कि किसी छात्र को इस तरह समिति के समक्ष बुलाए जाने का यह दुर्लभ मामला है।वहीं री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक की कोशिशें भी सामने आईं, लेकिन CBSE के अनुसार पोर्टल सामान्य रूप से संचालित होता रहा।

सार्थक ने सात पेज का अपना प्रजेंटेशन पेश किया था। इसमें ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए वेंडर्स (कंपनियों) का चयन करने की टेंडर प्रक्रिया में खामिकों को दिखाते हुए बोर्ड के सामने कई सवाल भी खड़े किए थे। आइए जानते हैं कौन हैं रांची के सार्थक सिद्धांत ?

कौन हैं रांची के सार्थक सिद्धांत?

सार्थक सिद्धांत झारखंड की राजधानी रांची के निवासी हैं। 18 साल के सार्थक सिद्धांत CBSE बोर्ड से कक्षा 12 के छात्र हैं। उन्होंने इसी साल 12वीं की परीक्षा दी थी। जब रिजल्ट आया तो सार्थक सिद्धांत ने नए मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाए और अपनी री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए अपनी स्कैन आंसर शीट मांगी थी।

जब उन्हें आंसर शीट मिली तो उन्हें कुछ शक हुआ। इसके बाद उन्होंने जांच पड़ताल शुरू की और नए मार्किंग सिस्टम की खामियों को अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया।

सार्थक ने ब्लॉग में क्या कहा?

सार्थक ने पड़ताल में पाया कि हैदराबाद की कंपनी कॉएम्पट एडुटेक को सीबीएसई ने टेंडर दिया था। टेंडर देने के लिए बोर्ड ने तीन बार नियमों में बदलाव किया। कॉएम्पट एडुटेक ‘ब्लैकलिस्टेड’ कंपनी है, उसे जोड़ने के लिए प्रावधान को भी बदला गया। जिस कंपनी पर पहले भी गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, ऐसी कंपनी को फिर से टेंडर क्यों दिया गया?

1.दो बार टेंडर रद्द होने के बाद तीसरे प्रयास में पात्रता शर्तों में बदलाव किया गया।

2.औसत वार्षिक टर्नओवर की सीमा ऐसी रखी गयी कि कोएम्प्ट पात्र हो सके।

3.ब्लैकलिस्टिंग संबंधी शर्त में ‘अर्लियर’ शब्द जोड़ने पर सवाल उठाए।

4.आरोप है कि ‘अर्लियर’ शब्द जोड़ने से पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी को लाभ मिला।

5.सीएमएमआई स्तर की अनिवार्यता 5 से घटाकर 3 किए जाने पर आपत्ति उठाई।

6.डेटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी सेंटर की मूल शर्तें नरम की गईं।

7.थर्ड पार्टी क्लाउड सेवा एडब्ल्यूएस, एज्योर और गूगल क्लाउड की अनुमति दी गई।

CBSE OSM Tender Case

 

 

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