भाजपा में जाने से बेहतर है जेल जाकर हीरो बनो, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता मत करो।’-प्रणिती शिंदे

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मुंबई,

मुंबई(HRIDAY STAMBH);

राहुल गांधी के नेतृत्व, कांग्रेस की विचारधारा और संविधान की रक्षा को लेकर भी रखी अपनी बात, कहा- मैं किसी व्यक्ति की नहीं, कांग्रेस की विचारधारा की कार्यकर्ता हूं

महाराष्ट्र की सोलापुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर खुलकर अपनी बात रखते हुए पार्टी बदलने की चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए विचारधारा और सिद्धांतों से समझौता करना उनके स्वभाव में नहीं है। भाजपा में शामिल होने के बजाय जेल जाना उन्हें बेहतर लगता है, लेकिन वह अपने राजनीतिक मूल्यों से पीछे नहीं हटेंगी। उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के भीतर उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता के स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशीलकुमार शिंदे की बेटी प्रणिती शिंदे ने एक साक्षात्कार के दौरान अपने राजनीतिक जीवन, सामाजिक कार्यों, राहुल गांधी की भूमिका और देश के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने बताया कि राजनीति में आने का फैसला उन्होंने शुरुआत से नहीं किया था, बल्कि सामाजिक कार्यों के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़कर ही बड़े स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

सामाजिक कार्यों से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

प्रणिती शिंदे के मुताबिक राजनीति में आने से पहले उनकी दिलचस्पी सामाजिक गतिविधियों और सामुदायिक विकास के कार्यों में थी। उन्होंने पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स की पढ़ाई के बाद कानून की शिक्षा भी प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने ‘जाईजुई’ संस्था के माध्यम से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

इस संस्था के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को समझने और जरूरतमंदों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने जैसे कार्य किए गए। सामाजिक क्षेत्र में काम करते हुए उन्हें यह अनुभव हुआ कि केवल व्यक्तिगत प्रयासों और सीमित संसाधनों के सहारे बड़ी आबादी तक पहुंचना संभव नहीं है।
इसी अनुभव ने उन्हें राजनीति की ओर प्रेरित किया। उनका मानना था कि यदि समाज के लिए व्यापक स्तर पर काम करना है तो निर्णय लेने वाली व्यवस्था का हिस्सा बनना जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखने का फैसला किया।

पिता भी हैरान रह गए थे चुनाव लड़ने के फैसले से

प्रणिती शिंदे ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2009 में जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया, तब उनके पिता सुशीलकुमार शिंदे भी उनके इस फैसले से हैरान रह गए थे।
हालांकि, उन्होंने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए मेहनत की और जनता के बीच सक्रिय रहकर काम किया। बाद के चुनावों में मिले जनसमर्थन को वह अपने काम और जनता के साथ जुड़ाव की स्वीकृति मानती हैं।
उनकी राजनीतिक यात्रा में सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण और आम लोगों की समस्याओं को प्रमुख स्थान मिला। अब लोकसभा में सोलापुर का प्रतिनिधित्व करते हुए वह राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।

राहुल गांधी के नाम पर नहीं, कांग्रेस की विचारधारा पर भरोसा

कांग्रेस सांसद ने राहुल गांधी के नेतृत्व में होने वाले आंदोलनों और पार्टी के भीतर अपनी भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद को किसी व्यक्ति विशेष की टीम का सदस्य मानकर राजनीति नहीं करतीं।
उनके अनुसार, उनकी पहचान एक कांग्रेसी कार्यकर्ता के रूप में है और वह कांग्रेस की विचारधारा के साथ जुड़ी हुई हैं। उनके लिए राजनीति का आधार किसी नेता के प्रति व्यक्तिगत निष्ठा नहीं, बल्कि उन सिद्धांतों और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता है, जिन पर पार्टी की विचारधारा टिकी हुई है।

उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और देश की एकता को राजनीति का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि जिस संविधान की शपथ लेकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा है, उसके मूल्यों की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।

संविधान और धर्मनिरपेक्षता को बताया अपनी राजनीति का आधार

प्रणिती शिंदे ने देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर अपनी बात रखते हुए धर्मनिरपेक्षता, सभी धर्मों के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की मूल भावना को सुरक्षित रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का दायित्व है।

अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने महात्मा गांधी, राजर्षि शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों का भी उल्लेख किया। इन महापुरुषों के विचारों को उन्होंने अपने सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ बताया।
उनकी बातों से यह स्पष्ट हुआ कि वह सामाजिक न्याय, समानता, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों को अपनी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं।

भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं पर लगाया विराम

प्रणिती शिंदे के राजनीतिक भविष्य को लेकर वर्ष 2024 में भाजपा में शामिल होने की अटकलें सामने आई थीं। इस विषय पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन उन्होंने कभी कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के बारे में गंभीरता से विचार नहीं किया।

उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता किसी उम्मीदवार को केवल उसके नाम या व्यक्तिगत पहचान के आधार पर समर्थन नहीं देती, बल्कि उसकी विचारधारा और सिद्धांतों पर भी भरोसा करती है। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक सुविधा के हिसाब से पार्टी बदलना मतदाताओं के विश्वास से जुड़ा गंभीर सवाल है।
इसी संदर्भ में उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि भाजपा में शामिल होने से बेहतर है कि जेल जाकर संघर्ष किया जाए, लेकिन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जाए।

राजनीतिक गलियारों में बयान की चर्चा

प्रणिती शिंदे का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब देश की राजनीति में दल-बदल, नेताओं की निष्ठा और वैचारिक प्रतिबद्धता लगातार चर्चा के विषय बने हुए हैं। ऐसे माहौल में एक कांग्रेस सांसद का खुलकर अपनी पार्टी और विचारधारा के साथ खड़े रहने की बात कहना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उनके बयान का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान को परिवार की विरासत या किसी बड़े नेता के नेतृत्व तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक कार्यों, संविधान और कांग्रेस की विचारधारा से जोड़कर पेश किया है। साथ ही उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि राजनीति में पद और सत्ता से अधिक महत्व सिद्धांतों तथा जनता के विश्वास का होना चाहिए।

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