लखनऊ,
लखनऊ(HRIDAY STAMBH);
उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अभी से तेज हो गई है। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग और नेतृत्व की रणनीतियों को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान के कयास लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने अपनी जमीन मजबूत करने के लिए सांगठनिक मोर्चे पर बड़े फेरबदल किए हैं। इस पूरी रणनीति के केंद्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रियंका गांधी वाड्रा की मजबूत पकड़ और यूपी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ की भूमिका बेहद अहम हो गई है।
समाजवादी पार्टी के सामने ‘125 से 150 सीटों’ की डिमांड
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस इस बार के विधानसभा चुनाव में मजबूत सौदेबाजी के मूड में है। पार्टी समाजवादी पार्टी के सामने 125 से 150 सीटों का प्रस्ताव रखने की तैयारी कर रही है। वहीं, शुरुआती चर्चाओं में सपा द्वारा कांग्रेस को 60 से 65 सीटें देने की बात सामने आ रही है। कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य लोकसभा चुनाव 2024 और पिछले आंकड़ों को आधार बनाकर उन सीटों को सुरक्षित करना है, जहां उसका कैडर मजबूत रहा है, ताकि गठबंधन में उसकी स्थिति और ताकत बनी रहे।
सीटों की ‘A, B और C’ कैटेगरी ग्रेडिंग फॉर्मूला
अपनी स्थिति को पुख्ता करने के लिए कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर सीटों का आंकलन शुरू कर दिया है:
- Category A (लगभग 100 सीटें): वे सीटें जो पार्टी के लिहाज से सबसे मजबूत मानी जा रही हैं।
- Category B (40 से 50 सीटें): वे सीटें जहां पार्टी सीधे मुकाबले में है और थोड़ी मेहनत से जीत मिल सकती है।
- Category C (25 से 35 सीटें): अन्य वे सीटें जहां पार्टी अपनी स्थिति सुधारने पर जोर दे रही है।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ की केंद्रीय भूमिका और नया सियासी समीकरण
हाल ही में उत्तर प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालने वाली आराधना मिश्रा ‘मोना’ की भूमिका इस पूरी चुनावी बिसात में केंद्र बिंदु बन गई है। उन्हें कमान सौंपकर कांग्रेस ने कई सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है:
- प्रियंका गांधी की करीबी: आराधना मिश्रा को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का बेहद करीबी माना जाता है। प्रियंका के चर्चित अभियानों में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई है।
- मजबूत ब्राह्मण और महिला चेहरा: प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से विधायक रहीं आराधना मिश्रा एक कद्दावर ब्राह्मण और महिला नेत्री हैं, जिससे पार्टी राज्य के बड़े मतदाता वर्ग को साधना चाहती है।
- सपा के साथ समन्वय: प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही वह संगठन को धार देने और हर एक सीट की समीक्षा करने में जुटी हैं।
आगामी समय में प्रियंका गांधी की रणनीतिक प्लानिंग और आराधना मिश्रा ‘मोना’ का नेतृत्व यह तय करेगा कि ‘इंडिया’ गठबंधन यूपी में किस रूप में आगे बढ़ता है। क्या दोनों दलों के बीच सीटों के इस फासले को पाटा जा सकेगा? इस पर सभी राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
