शिवपुरी: सरकारी किताबों को कबाड़ में बेचने के मामले में ‘मौन’ जिला शिक्षा अधिकारी;

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शिवपुरी(HRIDAY STAMBH);शासकीय स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को मुफ्त पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा लाखों-करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहाया जाता है, लेकिन शिवपुरी जिले के नरवर तहसील अंतर्गत आने वाले शासकीय माध्यमिक विद्यालय टोरियाखुर्द से सामने आई एक घटना ने पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय की शैक्षणिक पुस्तकों को कबाड़ में बेचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। निष्पक्ष जांच में आरोप सिद्ध होने और प्रतिवेदन सौंपे जाने के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी आकाश यादव की चुप्पी ने कई संदेहों को जन्म दे दिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​यह पूरा मामला नरवर तहसील के ग्राम टोरियाखुर्द स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय का है, जहाँ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ था। इस वीडियो में विद्यालय की शैक्षणिक सरकारी पुस्तकों को खुलेआम कबाड़ में बेचा जा रहा था। मामला उजागर होने पर जब विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य हरनाम मौर्य से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने बेझिझक स्वीकार किया कि लगभग पाँच क्विंटल सरकारी किताबें उन्हीं के द्वारा कबाड़ में बेची गई हैं।

​सरकारी संपत्ति और बच्चों के भविष्य से जुड़ी पाठ्यपुस्तकों की इस प्रकार की कालाबाजारी की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया।

​जांच में आरोप सही साबित, पंचनामा तैयार

​घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके तहत करही संकुल प्राचार्य ने स्वयं स्कूल परिसर में जाकर मामले की जांच की। जांच के दौरान वायरल वीडियो पूरी तरह सत्य पाया गया और शिक्षक हरनाम मौर्य को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए मौके पर पंचनामा तैयार कर विस्तृत रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेज दी गई।

​वहीं, नरवर बीआरसी कार्यालय के अधिकारी प्रदीप अवस्थी ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पूरी तरह नियम विरुद्ध कार्य है और जानबूझकर की गई बड़ी लापरवाही है, जिस पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरी स्थिति से जिला शिक्षा अधिकारी को भी अवगत करा दिया गया था।

​डीईओ की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल

​जब संकुल प्राचार्य और बीआरसी स्तर से जांच पूरी हो चुकी है, पंचनामा प्रस्तुत किया जा चुका है और शिक्षक स्वयं अपना अपराध कबूल कर चुका है, तो फिर कार्रवाई में अड़चन कहाँ है?

​ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी आकाश यादव को इस मामले की लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन उनके द्वारा ना तो कोई संज्ञान लिया गया और ना ही दोषी शिक्षक पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। जब मीडिया या स्थानीय लोगों द्वारा डीईओ से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है, तो उनका फोन तक नहीं उठता।

​इस स्थिति को लेकर क्षेत्रवासियों के मन में कई तीखे सवाल उठ रहे हैं:

  • ​क्या जिला शिक्षा अधिकारी पर कोई राजनीतिक दबाव है, जिसके कारण सारे सबूत और जांच रिपोर्ट शिक्षक के खिलाफ होने के बावजूद उसे बचाया जा रहा है?
  • ​क्या कबाड़ बेचने का खेल अकेले शिक्षक का है या इसमें विभाग के किसी बड़े सिंडिकेट की भी सांठगांठ है जिसे छिपाने के लिए फाइल दबाई जा रही है?

​जब शिक्षा विभाग के जिला अधिकारी ही इस तरह मौन बैठ जाएं, तो फिर कार्रवाई करेगा कौन?

​जनता की मांग और आगामी कदम

​अब क्षेत्रवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोषी प्राचार्य को उसके पद से हटाकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी या फिर वह इसी तरह अपने पद पर बना रहेगा। स्थानीय निवासियों ने शिवपुरी कलेक्टर, प्रदेश के शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषी शिक्षक के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए और मामले को ठंडे बस्ते में डालने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

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