आदिनाथ भगवान को कैलाश पर्वत से मोक्ष के साथ हुआ पंचकल्याणक महोत्सव का समापन गजरथ फेरी को देखने उमड़ा अपार जन समूह नव निर्मित जिनालय में विराजमान हुए भगवान

शिवपुरी

खनियांधाना 

नगर में आयोजित पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव के अंतिम दिन आज निकाली गई गजरथ फेरी को देखने अपार जन समूह उमड़ पड़ा जिसमें नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग इसे देखने आए। विशाल तीन रथों में भगवान को विराजमान कर कार्यक्रम स्थल की सात परिक्रमा दी गई । इस गजरथ फेरी में मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज , निरापद सागर जी महाराज तथा ऐलक , छुल्लक , ब्रह्मचारी गण चल रहे थे तथा सैकड़ो की संख्या में इंद्र इंद्राणी भक्ति नृत्य करते हुए शोभा बढ़ा रहे थे ।
महोत्सव समिति के कार्याध्यक्ष नीलेश जैन खिरकिट एवं सनत जैन देदामूरी ने बताया कि महोत्सव के अंतिम दिन आज प्रातः काल भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया गया जिसमें कैलाश पर्वत की रचना की गई एवं विधि नायक भगवान आदिनाथ को आत्म साधना में पूर्ण होकर चौदहवां गुणस्थान प्रगटा कर एवं अष्ट कर्म का नाश करके मोक्ष प्राप्ति का दृश्य बड़े ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया । महोत्सव का समापन पूजन एवं विश्व शांति महायज्ञ आदि सभी कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैयाजी , अशोकनगर द्वारा संपन्न कराए गए ।
गजरथ फेरी को देखने के लिए देश तथा विदेश के कई नगरों से पधारे जैन श्रद्धालुओं के अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे । फेरी में सबसे पहले जैन रेजीमेंट था जो केसरिया ध्वज लहराते हुए परेड प्रस्तुत कर रहे थे उसके बाद पूरा मुनि संघ एक साथ चल रहा था । अशोकनगर से आए विशाल रथ को दो हाथियों द्वारा खींचा जा रहा था जिसमें सौधर्म इंद्र इंद्राणी , कुबेर, यज्ञनायक तथा भगवान के माता-पिता बैठे थे तथा दूसरे रथ में महामंडलेश्वर राजा रानी , भरत बाहुबली आदि थे । इसके बाद सैकड़ो की संख्या में इंद्र इंद्राणी तथा श्रद्धालु चल रहे थे । इस प्रकार सात फेरी लगाई गई प्रत्येक फेरी के शुभारंभ पर हाथियों को गन्ना , गुड़ एवं मिठाई श्रद्धालुओं द्वारा खिलाई गई ।

दोपहर बाद गजरथ फेरी के समापन पश्चात नवीन प्रतिष्ठित हुए जिन बिंबो को शोभायात्रा पूर्वक नगर के प्राचीन श्री पारसनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर के नवनिर्मित जिनालय में प्रवेश कराया गया तथा विधि विधान पूर्वक भगवान को नवीन वेदियों पर विराजित किया गया जिसमें प्रतिष्ठाचार्य के साथ सहयोगी प्रतिष्ठाचार्य पं. अनुभव जी शास्त्री खनियाधाना का विशेष सहयोग रहा । सांय काल में नवीन जिन मंदिर में जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया गया ।

भोजनशाला की व्यवस्था रही आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में भोजनशाला की व्यवस्थाएं अद्वितीय रहीं, जहाँ प्रतिदिन सुबह-शाम हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया गया। नगरवासियों द्वारा ‘बादशाह दारू वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध व्यवस्थापकों, भोजनशाला प्रभारी और उनकी टीम ने शानदार प्रबंधन किया। यहाँ वॉलिंटियर्स और सेवा दल के सदस्यों ने पूरे पंचकल्याणक के दौरान अपनी नि:स्वार्थ सेवाएं प्रदान कीं, जिसकी सभी आगंतुकों ने मुक्तकंठ से सराहना की।

समिति ने व्यक्त किया आभार

समस्त पंचकल्याणक महोत्सव समिति एवं मीडिया प्रभारी संजीव जैन चौधरी ने बताया कि मुनिसंघ के आशीर्वाद, नगरवासियों के अटूट सहयोग और सेवादारों के परिश्रम से यह महोत्सव खनियांधाना के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है।
समस्त पंचकल्याणक महोत्सव समिति के सदस्यों ने इस सफल आयोजन के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी धर्मप्रेमियों का हृदय से आभार व्यक्त किया है

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