भोपाल
32 हजार मेगावाट क्षमता में 30 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा, सौर-पवन के साथ पंप स्टोरेज पर जोर,भोपाल में देशभर के ऊर्जा विशेषज्ञों का मंथन
भोपाल। कभी बिजली की कमी से जूझने वाला मध्यप्रदेश अब पावर सरप्लस राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के साथ देश की बढ़ती बिजली मांग में भी योगदान देने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 32 हजार मेगावाट कुल ऊर्जा क्षमता में करीब 30 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा का है। पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए नवकरणीय ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को भोपाल के होटल मैरिएट में ‘नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद’ विषय पर आयोजित ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। सम्मेलन में देशभर से ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ और बिजली वितरण कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं को सस्ती और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने और विद्युत व्यवस्था के संधारण पर भी लगातार काम कर रही है। नई तकनीक और आधुनिक विद्युत इकाइयों के जरिए उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है।
उन्होंने नीमच-मंदसौर में 2,000 मेगावाट क्षमता के ग्रीन-गो प्लांट का उल्लेख करते हुए कहा कि इस स्तर की परियोजनाओं को सामान्यतः चार से छह वर्ष लगते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे ढाई वर्ष के भीतर पूरा किया जा रहा है। उन्होंने सौर और पवन ऊर्जा के साथ पंप स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि बिजली की बढ़ती मांग के बीच ऊर्जा व्यवस्था को विश्वसनीय, टिकाऊ और किफायती बनाए रखना बड़ी चुनौती है। सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण का संतुलित मिश्रण विकसित कर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार को कम किया जा सकता है। सम्मेलन में इसी दिशा में किफायती खरीद और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को लेकर विशेषज्ञों ने मंथन किया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन से बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और बदलती ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था तैयार करने के लिए उपयोगी सुझाव सामने आएंगे।



