ग्वालियर
आखिर किसकी है नैतिक जवाबदेही?
ग्वालियर (HRIDAY STAMBH): नेशनल हाईवे पर बेसहारा गोवंश के कारण रोजाना भीषण सड़क हादसे हो रहे हैं। कम दृश्यता और लापरवाही से मासूम जिंदगियां खत्म हो रही हैं। रात में हाईवे पर अचानक पशु सामने आने से गाड़ियां अनियंत्रित होकर टकरा रही हैं। हादसों में वाहन चालकों की मौत के साथ बेजुबान पशु भी दम तोड़ रहे हैं।
टोल ऑपरेटिंग एजेंसियां, स्थानीय प्रशासन/नगर निकाय और लापरवाह पशुपालक भी कटघरे में आते है
सन्नाटे में गूंजती चीखें: नेशनल हाईवे पर हर रात मौत का खेल
रात के सन्नाटे में तेज रफ्तार से दौड़ते वाहन और अचानक सामने आ जाता है एक बेसहारा गोवंश… जब तक चालक ब्रेक दबाता है, तब तक सब कुछ बिखर चुका होता है। नेशनल हाईवे पर यह मंजर अब किसी एक दिन की कहानी नहीं, बल्कि हर रोज की कड़वी हकीकत बन चुका है।
आए दिन होने वाले इन भीषण हादसों में लोग असमय अपनों को खो रहे हैं और पूरा परिवार तबाह हो रहा है। लेकिन हादसों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर इन मौतों और तबाही की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी किसकी है?
कम दृश्यता और अचानक ब्रेक: हादसे का मुख्य कारण
रात के समय नेशनल हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार तेज होती है और दृश्यता बेहद सीमित हो जाती है इस कारण दूर से सड़क पर बैठे या अचानक दौड़कर सामने आने वाले पशुओं का अंदाजा लगाना चालकों के लिए लगभग असंभव होता है।
अचानक बचाव के प्रयास में गाड़ियां डिवाइडर से टकराती हैं या पलट जाती हैं। इन हादसों में न केवल इंसान अपनी जान गंवाते हैं, बल्कि बेजुबान मवेशी भी तड़प-तड़पकर दम तोड़ देते हैं।
जिम्मेदारी से सब बेखबर: आखिर किसकी है नैतिक जवाबदेही?
दुर्घटना के बाद पुलिस पंचनामा बनाती है, क्रेन से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटा दिया जाता है और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कोई भी तंत्र अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करता
टोल टैक्स में ‘सुरक्षा और गश्त (Highway Patrolling)’ की फीस शामिल होने के बावजूद हाईवे पर मवेशियों को रोकने में प्रबंधन पूरी तरह विफल है। इसके साथ ही गौशालाओं और कांजी हाउस के निर्माण के बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। धरातल पर स्थितियां जस की तस हैं।
दूध निकालने के बाद मवेशियों को सड़कों पर लावारिस छोड़ देने वाले पशुपालक इस समस्या की मूल वजह हैं, जिन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
सड़क सुरक्षा के लिए 4 तत्काल और व्यावहारिक समाधान
यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो देश के नेशनल हाईवे ‘मौत के कॉरिडोर्स’ बने रहेंगे। इसके लिए टोल पेट्रॉलिंग टीमों को रात में 24×7 मुस्तैद रखा जाए और आवारा गोवंश के सींगों व गले में रेडियम रिफ्लेक्टर बैंड लगाए जाएं। हाईवे के आसपास बने आश्रय स्थलों को पर्याप्त फंड और संसाधन देकर पूरी तरह क्रियाशील बनाया जाए।
मवेशियों को खुला छोड़ने वाले मालिकों का टैगिंग के जरिए पता लगाकर उन पर भारी जुर्माना और FIR दर्ज की जाए।हाईवे पर आवारा पशु दिखने पर तुरंत हटाने के लिए एक समर्पित टोल-फ्री हेल्पलाइन चालू की जाए।
National Highway Stray Cattle Accidents
