शिवपुरी
1985 में अधिग्रहित रेलवे भूमि खाली करने का नोटिस
शिवपुरी (HRIDAY STAMBH):बदरवास नगर परिषद स्थित वार्ड नंबर 14 में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब रेलवे विभाग और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची। टीम ने रेलवे की अधिग्रहित भूमि पर बने मकानों को खाली करने के निर्देश दिए। इस कार्रवाई के बाद से पिछले 24 घंटे में क्षेत्र के करीब 150 से अधिक परिवारों के सामने बेघर होने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
1965 से निवास का दावा, नगर परिषद के सर्वे में बने हैं 200 मकान
स्थानीय लोगों की माने तो वे वर्ष 1965 से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। समय के साथ लोगों ने अपने मकान बनाए, बच्चों का पालन पोषण किया और कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिला। किसी ने रजिस्ट्री के आधार पर तो अधिकांश लोगों ने नोटरी के आधार पर मकान बना लिए और वर्षों निवास कर रहे है। नगर परिषद के सर्वे से नंबर 15, 16, 17, 18, 19 और 20 में लगभग 20 बीघा भूमि पर करीब 200 मकान बने हुए है।
₹10 के नोटरी स्टाम्प पर हुई थी जमीन की बिक्री
रेलवे भूमि विवाद में सामने आए दस्तावेज के अनुसार करीब 10 रुपए के नोटरी स्टाम्प पर पांच लोगों के हस्ताक्षर कर भूमि का विक्रय दर्शाया गया था। इसी नोटरी के आधार पर गिरधारीलाल कुशवाहा द्वारा भूरेलाल चंदेल के नाम जमीन बेचे जाने का उल्लेख है।
बाद में इसी दस्तावेज को आधार बनाकर भूरेलाल ने मकान का निर्माण कराया और वर्षों से परिवार सहित निवास करते रहे। अब रेलवे द्वारा भूमि पर स्वामित्व का दावा करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू किए जाने से नोटरी के आधार पर हुए ऐसे सौदों की वैधता और भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। लगभग 150-200 परिवार बेघर होने की आशंका से चिंतित है।
रेलवे विभाग का पक्ष: 1985 में ही हो चुका था अधिग्रहण
रेलवे विभाग का कहना है कि यह भूमि (Railway Land Dispute) वर्ष 1985 में अधिग्रहित की जा चुकी थी। अब विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार इस भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ करने जा रहा है। इसी कारण क्षेत्र को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अचानक हुई कार्रवाई से तो क्षेत्र के लोग सकते में हैं। उनका कहना है कि यदि मकान हटाए गए उनके सामने रहने का कोई विकल्प नहीं बचेगा। प्रभावित परिवार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से राहत तथा पुनर्वास की मांग कर रहे है।
रेलवे व सीआरपीएफ की टीम ने दी समझाइश
रेलवे विभाग व आरपीएफ की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्रवासियों से संवाद किया। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि वर्ष 1985 में रेलवे के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। अब विभाग इस भूमि पर आवश्यक निर्माण कार्य कराएगा, इसलिए सभी लोगों से स्वेच्छा से मकान खाली करने को कहा गया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में मकान खाली नहीं किए गए तो प्रशासन की सहायता से नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
