इंदौर
इंदौर शहर में एक थप्पड़ ने बड़े विवाद का रूप ले लिया। इस विवाद में मूल रूप से सामने आया कि प्रशासन की दादागिरी सिर्फ आम आदमी पर चलती है लेकिन जब भी कार्यवाही भाजपाई पर होती है तो सिस्टम घुटनों पर आ जाता है।
शहर के महूनाका चौराहे पर शुक्रवार को ट्रैफिक चेकिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में बड़ा राजनीतिक हंगामा बन गया। हेलमेट चेकिंग के दौरान भाजपा से जुड़े एक बाइक सवार युवक और ट्रैफिक पुलिस के बीच विवाद हुआ, जिसमें ट्रैफिक टीआई राधा यादव द्वारा युवक को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया गया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और चक्काजाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा विधानसभा-4 प्रभारी वीरेंद्र शेडगे की बाइक को ट्रैफिक पुलिस ने हेलमेट जांच के दौरान रोका था। इसी दौरान बहस बढ़ी और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। आरोप है कि ट्रैफिक टीआई राधा यादव ने युवक को थप्पड़ मार दिया, जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया।
देखते ही देखते महूनाका चौराहा प्रदर्शन स्थल में बदल गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और “राधा यादव मुर्दाबाद” के नारे लगाए। प्रदर्शन के चलते यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्री बसें और वाहन लंबे समय तक जाम में फंसे रहे।
टीआई लाइन अटैच, दो पुलिसकर्मी निलंबित
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्रैफिक टीआई राधा यादव को फील्ड ड्यूटी से हटाकर कार्यालय अटैच कर दिया। वहीं कॉन्स्टेबल शेखर और सूबेदार लक्ष्मी धुर्वे को निलंबित कर दिया गया। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छिड़ गई है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्य गौड़ समर्थकों का भी मौके पर दबाव बना रहा। इस कारण मामला केवल ट्रैफिक पुलिस और वाहन चालक के बीच का विवाद नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जाने लगा।
बिना हेलमेट पुलिसकर्मी का भी चालान
हंगामे के दौरान मौके पर पहुंचे एक पुलिसकर्मी को बिना हेलमेट बाइक चलाते देख प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया। इसके बाद दबाव में संबंधित पुलिसकर्मी का चालान भी बनाया गया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा है।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
महूनाका घटना के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में ट्रैफिक पुलिस पर आम नागरिकों से अभद्रता और मारपीट जैसे आरोप पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन उन मामलों में इतनी तेज कार्रवाई कम ही देखने को मिली। ऐसे में विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि ट्रैफिक पुलिस का व्यवहार गलत था तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन सड़क जाम कर आमजन को परेशान करने वालों पर भी कार्रवाई जरूरी है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर पुलिस प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।
