कांग्रेस के अंदर भाजपा के धुरंधर जो भाजपा की मदद करते है

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अगर ये भाजपा में आए तो भाजपा से चुनाव हार जायेंगे

NEWS UPDATE: हिमंत बिस्वा सरमा ने दिए अपने एक इंटरव्यू से कोहराम मचा दिया है जिसमे उन्होंने कहा कि आज भी कांग्रेस के अंदर मेरे कई धुरंधर काम कर रहे है जो मुझे वहाँ की एक एक जानकारी देते है साथ ही भाजपा की मदद करते है हालाकि ये बात राहुल गांधी खुले मंच से पहिले भी स्वीकार चुके है लेकिन भाजपा के किसी बड़े नेता के द्वारा ये स्वीकारोक्ति बड़ी चर्चा का विषय है जिसने कांग्रेस संगठन की कमजोर छवि पर सवाल उठा दिया है

असम विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार भाजपा-एनडीए की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने इंडिया टूडे ग्रुप से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के अंदर उनके कई धुरंधर काम कर रहे हैं, जो अंदरखाने भाजपा की मदद करते हैं।

हिमंता ने फिल्म ‘धुरंधर’ का जिक्र करते हुए तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में हमारे कई धुरंधर हैं। हमने 30 ऐसे उम्मीदवारों के नाम दिए थे, जिनके हमारे साथ अच्छे संबंध हैं। कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया और उनमें से 6 उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंच गए हैं।

असम सीएम ने कहा कि कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता ही हमारी मदद करते हैं। खुलकर मदद करते हैं। हमें दुश्मन के कैंप में भी ऑपरेट करना पड़ता है। हिमंता ने स्पष्ट किया कि ये नेता जासूस नहीं हैं, बल्कि अपना राजनीतिक करियर बचाने के लिए कांग्रेस में रहकर भाजपा का साथ देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये भाजपा में आएंगे तो शायद हार जाएंगे, इसलिए वे कांग्रेस में रहकर ‘देश की सेवा’ करते हुए भाजपा की मदद कर रहे हैं।

हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस की हार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि असम में कांग्रेस अब ‘मियां मुसलमान’ की पार्टी बनकर रह गई है। इस बार कांग्रेस के 19 जीते हुए उम्मीदवारों में से 18 मुस्लिम हैं और सिर्फ एक हिंदू उम्मीदवार जय प्रकाश दास लखीमपुर की नाउबोइचा सीट से जीते हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के इन 6 ‘धुरंधर’ विधायकों के राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने की संभावना है।

आपको बता दें कि असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा-एनडीए गठबंधन ने 102 सीटें जीतीं। भाजपा अकेले 82 सीटें जीतने में सफल रही। पार्टी ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसका स्ट्राइक रेट करीब 92% रहा। सहयोगी असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने 10-10 सीटें हासिल कीं। 2016 से सत्ता में काबिज भाजपा ने इस बार तीसरी बार सरकार बनाने का मौका हासिल किया है। हिमंता बिस्वा सरमा की लोकप्रियता और विकास कार्यों को इस जीत का बड़ा कारण माना जा रहा है।

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