भितरवार
आबकारी विभाग की मिलीभगत से फल फूल रहा यह कारोबार
इमरान खान,
शराब कहे या कंजर व्हिस्की कहने को तो प्रतिबंधित है पर भितरवार , मोहना, घाटीगांव अंचल में यह बड़े पैमाने पर बनाई और बेची जाती है। प्रशासन कितनी भी कोशिश क्यों ना कर ले पर शराब माफिया बेखौफ अपने काम को अंजाम देने में लगे हुए हैं। कच्ची शराब का यह खेल बड़े पैमाने पर डबरा,भितरवार अंचल में खेला जाता है, यहां एक जाति जिसे हम कंजर जाति के रूप में पहचानते हैं अवैध शराब का कारोबार में पीढ़ियों से करती आ रही है, इसे बनाना और बेचना ही उनका पेशा है, जो इस जाति को विरासत में मिला है। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रशासन कितनी भी कार्यवाही कर लें पर यह अवैध शराब का कारोबार रूकने का नाम नहीं ले रहा हैं। वहीं डबरा विकासखंड के कुछ गांवों में भी अवैध कच्ची शराब का कारोबार फैल चुका है। यहां कंजर जाति के अलावा अन्य जातियां भी इस अवैध कारोबार में लिप्त है।
अंचल में अवैध शराब निर्माताओं पर लगातार कार्यवाहियों में अब तक लाखों रुपए की अवैध देशी शराब का पकड़ना, इस बात का प्रमाण है, कि शराब का यह खेल डबरा,भितरवार , मोहना, घाटीगांव में बड़े पैमाने पर चल रहा है, क्योंकि कंजर व्हिस्की उत्पादन के लिए कुख्यात भितरवार एंव मोहना, घाटीगांव,क्षेत्र से बड़ी मात्रा में हाथ भट्टी देशी शराब शिवपुरी और दतिया जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचाई जाती है। शराब के ठेके पर उपलब्ध देशी शराब की तुलना में कंजर व्हिस्की कम कीमत में एंव आसानी से उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्र में इसकी अच्छी खासी खपत है, यही कारण हैं कि
इसका उत्पादन लगातार जारी है।
भितरवार विकासखंड के ग्वालियर-शिवपुरी बॉर्डर पर स्थित ग्राम दुवाह, दुबई, चक मियाँपुर, लाल डांडा चीनोर, चमेली का चक, गोलपुरा, केरूआ, बसई पर कंजरों के डेरा सबसे बड़ा अवैध शराब बनाने का अड्डा है। वही डबरा विकासखंड के पिछोर थाना क्षेत्र के चिरूली, जतारा, धमनिका, गुझार, पुट्टी आदि गांवों में कंजरों के अलावा अन्य लोग भी अब शराब बनाने के धंधे में शामिल हो चुके हैं।
अवैध कारोबार पर नही लग पा रहा अंकुश
एक साल में पुलिस व आबकारी टीम ने कंजरो के यहां से तीन करोड़ से ज्यादा की शराब व गुड़लहान और इसे
बनाने का सामान जब्त किया है। यहां पर कई सालों से शराब बनाई जा रही है और शहर में पहुंचाई जा रही है। भितरवार क्षेत्र के ग्राम दुवाह, दुबई, चमेली का चक पर कंजरों के डेरों और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब बनाई जा रही है। लेकिन खास बात यह है कि इतने सालों से यहां बड़े पैमाने पर शराब बनाई जा रही है और चोरी छिपे बिक रही है, रोक नहीं लग पा रही। विगत एक साल में यहां शराब बनाने की कई फैक्ट्रीनुमा अड्डे मिले
जिले की सीमा पर स्थित गांवों पर फैला हैं कारोबार
हाथ भट्टी शराब बनाने के लिए कुख्यात कंजर जाति के डेरे ग्वालियर जिले के अंतिम छोर पर है। इसके बाद यहां से शिवपुरी-करैरा की सीमा लग जाती है। अंतिम छोर पर होने की वजह से यहां पर बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाई जाती है और इसके बाद दूसरे जिलों और प्रदेशों में परिवहन कर दिया जाता है। इस जगह कई बार कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन हर बार लाखों रुपए की शराब यहां पर मिल जाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराब बनाने का यहां पर दिन रात काम चलता है। लेकिन इतनी मात्रा में शराब बनाए जाने के बाद भी पुलिस को भनक तक नहीं लग पाती है। यह शराब अकेले भितरवार घाटीगांव, मोहना सहित आसपास के अंचल के अलावा यह कच्ची शराब मध्यप्रदेश के साथ साथ उत्तरप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रदेशों में भी पहुंचती है
कच्ची शराब सैम्पल में पाई गई थी जहरीली शराब के रूप में
पिछले कुछ माह पहले भितरवार के ग्राम बसई, बमरोल, चक मियांपुर पर पकड़ी गई हाथ भट्टी की कच्ची शराब का सेम्पल की जांच में शराब के जहरीला होने के तत्व निकल कर सामने आए थे, उसके बाद भी इन्ही जगहों पर फिर से वड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाने का कारोबार संचालित हो रहा है
शहर की कॉलोनियों में बिक रही कच्ची शराब
ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई जा रही कच्ची शराब को शराब माफिया शहर में लाकर खपा रहे हैं। यही कारण है कि शहर की अयोध्या कॉलोनी, जवाहर कॉलोनी, प्रेम नगर कॉलोनी, जेल रोड, अंबेडकर कॉलोनी, पिछोर रोड, दीदार कॉलोनी, लक्ष्मी कॉलोन, टेकनपुर, चिरूली, बिलौआ, लखनपुरा, लदेरा, पिछोर, गिजौर्रा सहित भितरवार नगर के वार्ड नं 02,04, 05 ,सांसन, घाटमपुर, वार्ड नं 10,14, 13,11 सहित अन्य कॉलोनियों में हजारों लीटर कच्ची शराब प्रतिदिन बेची जा रही है। आए दिन पुलिस कार्रवाई में पकड़ी जा रही कच्ची शराब इस बात का प्रमाण है, कि अंचल में बड़े पैमाने पर हाथ भट्टी शराब खप रही है
जाति विशेष को जागरूक करने की जरूरत हैं…
इस अवैध कारोबार को लेकर अधिकारियों कहना है कि इस कारोबार से जुडी कंजर जाति के लोगों को जागरूक करने की जरूरत है, यदि उन्हें किसी अन्य पेशे की तरफ डायवर्ट किया जाए तो शायद वह इस धंधे से दूर हो सकते हैं। पर यह कंजर व्हिस्की जो इस समय जगह-जगह बड़े पैमाने पर बन रही है। इसको लेकर प्रशासन चुनाव के समय ही सख्त दिखता है और लगातार कार्यवाहियों का दौर भी जारी रहता है पर उसके बाद यह खेल बड़े आराम से खेला जाता है। गली गली और गांव गांव में पॉलिथीन में भरकर यह शराब बेची जा रही है और पीने वाले लोग बड़ी आसानी से इसे ले जाते हैं।
2000 के सामान में तैयार हो जाती है 50 हजार की शराब
कच्ची शराब कहने को तो बिना डिग्री की है ना तो इसका कोई भरोसा है ना ही नशे का कोई पैमाना, पर सस्ती होने के चलते लोगों का झुकाव इसकी ओर ज्यादा है। जब हमने बात की तो शराब माफिया का कहना था कि यह मात्र 2000 रुपए में 25 लीटर शराब बन जाती है जो 200 से 300 लीटर बिकती है इसमें भी कैडर होता है, जो पहले उतरती है वह ज्यादा नशीली और ज्यादा महंगी धीरे-धीरे सबसे आखरी का रेशियो कम होता जाता है उसी हिसाब से इनके ग्राहक भी तय होते हैं।
पुलिस और आबकारी का नहीं होता कोई खौफ
कच्ची जहरीली शराब माफियाओं को ना तो पुलिस का खौफ होता है ना ही आबकारी का क्योंकि अधिकांश बार यह लोग जब कार्रवाई करते हैं तो इनके हाथ सिर्फ सामग्री ही आती है आरोपी पुलिस और आबकारी की गिरफ्त से हमेशा दूर बने रहते हैं। यही कारण है कि थोड़े से नुकसान के बाद यह कारोबार दोबारा शुरू हो जाता है।
