भोपाल पहुंचते ही रोकी गई ‘आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा’ 200 किमी पैदल चलकर आए कार्यकर्ता

राज्य

बैरिकेड्स लगाकर पुलिस ने बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास रोका

भोपाल: बैतूल से शुरू हुई ‘आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा’ जैसे ही शुक्रवार सुबह राजधानी भोपाल की सीमा में दाखिल हुई, पुलिस ने उसे रोक दिया। छात्र नेता रामकुमार नागवंशी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता 200 किलोमीटर का सफर तय कर भोपाल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री निवास तक जाने की अनुमति नहीं मिली। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए कार्यकर्ताओं को बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास ही रोक कर एक होटल के बाहर बिठा दिया।

प्रमुख मांग: सरकारी कर्मचारी का दर्जा और उचित वेतन
पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की लंबे समय से चली आ रही मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
1.आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।
2. न्यूनतम वेतन में वृद्धि और बेहतर कार्य सुविधाएं प्रदान की जाएं।
3. वर्षों से कम मानदेय पर काम कर रही महिलाओं के आर्थिक शोषण को बंद किया जाए।
बैतूल से भोपाल 11 दिनों का तपता संघर्ष
यह पदयात्रा 1 अप्रैल को बैतूल जिले के अंबेडकर चौक से शुरू हुई थी। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच कार्यकर्ताओं ने 11 दिनों में करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय की। नेतृत्व कर रहे रामकुमार नागवंशी ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के संघर्ष को करीब से देखा है, इसीलिए उन्होंने इस आंदोलन का बीड़ा उठाया। मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की जिद पर अड़े कार्यकर्ताओं ने पुलिसिया कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की। नागवंशी ने आरोप लगाया कि उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने से रोका जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

“यह लाखों महिला कार्यकर्ताओं के अधिकारों की लड़ाई है। तपती गर्मी भी हमारा हौसला नहीं तोड़ पाई, और जब तक सरकार हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, यह संघर्ष जारी रहेगा।”

फिलहाल कार्यकर्ता भोपाल में ही डटे हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मुलाकात करेगा और उनकी जायज मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाएगा। यदि सुनवाई नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

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