नई दिल्ली
अगले वित्त वर्ष में सरकार का राजस्व 1.3 लाख करोड़ रुपए हो सकता है कम
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए सरकार ने शनिवार को पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की भारी कटौती की है। पेट्रोल, डीजल की कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है ताकि उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं पड़े लेकिन इससे अगले वित्त वर्ष में सरकार का राजस्व करीब 1.3 लाख करोड़ रुपए कम हो सकता है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है और डीजल पर यह 10 रुपए प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है। कटौती तुरंत लागू हो गई है। सरकार ने पिछले साल अप्रैल पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाया था। सरकार ने देसी बाजार में दोनों की पर्याप्त उपलब्धता तय करने के लिए डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर एक बार फिर शुल्क लगा दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डीजल निर्यात पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ निर्यात पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क लगाया है। पहले इनके निर्यात पर शुल्क नहीं था। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत से 1.4 करोड़ टन पेट्रोल और 2.36 करोड़ टन डीजल का निर्यात किया, जिसमें बड़ा हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज का रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर 10 रुपए की कमी की गई है। इससे उपभोक्ता कीमत में इजाफे से बच जाएंगे।
सरकार के अधिकारियों का अनुमान है कि शुल्क में कटौती से अगले पंद्रह दिनों में करीब 7,000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इससे संकेत मिलता है शुल्क में यह कटौती कुछ समय के लिए ही है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन ने कहा कि सरकार हर पंद्रह दिनों में डीजल और एटीएफ पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की समीक्षा करेगी। पेट्रोल की कीमतें रोजाना बदलने वाली मूल्य व्यवस्था से तय की जाती हैं, जो कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत, विनिमय दर और करों के पिछले 15 दिन के औसत पर काम करती है। अंतिम उपभोक्ता मूल्य में आधार मूल्य, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, डीलर कमीशन और राज्य-स्तरीय वैट शामिल होता है।
उन्होंने कहा कि शुल्क कटौती से अगले 15 दिन में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन जैसी तेल कंपनियों को करीब 1,500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि कटौती पूरे वित्त वर्ष 2027 में लागू रही तो सरकारी खजाने को 1.3 लाख करोड़ से 1.7 लाख करोड़ रुपए तक की चपत लग सकती है। एक अन्य अर्थशास्त्री ने कहा कि शुल्क में कटौती से तेल कंपनियों को राहत मिलेगी। यदि ऐसा नहीं होता तो कीमतों में वृद्धि का भार उपभोक्ताओं पर डाला जा सकता था।
