मुरैना,
मुरैना(HRIDAY STAMBH);
किराए के मकान में बना रखा था प्रतिबंधित इंजेक्शनों का गोदाम, आगरा से थोक में लाकर मुरैना में करते थे सप्लाई; 4.50 लाख रुपये बताई गई कीमत
मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना शहर में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ कोतवाली थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नशे के इंजेक्शनों की एक बड़ी खेप बरामद की है। पुलिस ने पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित एक किराए के मकान में छापेमारी कर अलग-अलग कंपनियों के कुल 2,856 इंजेक्शन जब्त किए हैं। जब्त इंजेक्शनों की बाजार कीमत करीब 4 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों मयंक गुप्ता, अनिल उर्फ बॉबी गुप्ता और ईशान वर्मा को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी उत्तर प्रदेश के आगरा से थोक में नशीले इंजेक्शन खरीदकर मुरैना में उनकी अवैध बिक्री और सप्लाई कर रहे थे। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।
किराए के मकान को बना रखा था नशीले इंजेक्शनों का गोदाम
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में एक मकान किराए पर ले रखा था। बाहर से सामान्य दिखाई देने वाले इस मकान का इस्तेमाल प्रतिबंधित इंजेक्शनों के भंडारण और अवैध कारोबार के लिए किया जा रहा था। आरोपी यहां बड़ी मात्रा में इंजेक्शन इकट्ठा करके रखते थे और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग स्थानों पर उनकी सप्लाई करते थे।
पुलिस के मुताबिक आरोपी आगरा से थोक में इंजेक्शन खरीदकर मुरैना लाते थे। इसके बाद मेडिकल स्टोर्स के माध्यम से और सीधे स्थानीय ग्राहकों को ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। इस पूरे कारोबार में किराए का मकान उनके लिए गोदाम की तरह काम कर रहा था।
100 रुपये का इंजेक्शन 200 से 300 रुपये में बेचते थे आरोपी
जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि आरोपी कम कीमत पर इंजेक्शन खरीदकर उन्हें दोगुने से तीन गुने तक दामों पर बेच रहे थे। बताया गया है कि जिस इंजेक्शन की खरीद कीमत करीब 100 रुपये थी, उसे 200 से 300 रुपये तक में बेचा जाता था। इस तरह कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से आरोपी प्रतिबंधित दवाओं का अवैध कारोबार कर रहे थे।
पुलिस को आशंका है कि इस कारोबार के जरिए शहर के युवाओं तक नशीले इंजेक्शन पहुंचाए जा रहे थे। कुछ युवक इन इंजेक्शनों का इस्तेमाल नशे के लिए तो कुछ वर्कआउट और शारीरिक क्षमता बढ़ाने के नाम पर गलत तरीके से कर रहे थे। हालांकि इंजेक्शनों के वास्तविक उपयोग, उनकी श्रेणी और मेडिकल दुरुपयोग से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है।
मुखबिर को ग्राहक बनाकर भेजा, इंजेक्शन देते ही पुलिस ने मारी दबिश
कोतवाली थाना प्रभारी अमित भदौरिया के नेतृत्व में पुलिस टीम लंबे समय से इस अवैध कारोबार पर नजर रखे हुए थी। पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शहर में कुछ लोग प्रतिबंधित इंजेक्शनों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए रणनीति तैयार की।
योजना के तहत पुलिस ने एक मुखबिर को ग्राहक बनाकर आरोपियों के पास भेजा। मुखबिर ने आरोपियों से संपर्क कर इंजेक्शन खरीदने की बात कही। बताया गया है कि आरोपियों ने उसे ‘Termine’ नामक इंजेक्शन उपलब्ध कराया। जैसे ही लेन-देन की पुष्टि हुई, आसपास सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर दबिश दे दी।
पुलिस ने घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। इसके बाद किराए के मकान की तलाशी ली गई, जहां से भारी मात्रा में अलग-अलग कंपनियों के इंजेक्शन बरामद हुए।
पांच कंपनियों के 2,856 इंजेक्शन बरामद
पुलिस की तलाशी के दौरान मेफेंटरमाइन (Mephetermine) और टर्माइन सहित पांच अलग-अलग कंपनियों के कुल 2,856 इंजेक्शन जब्त किए गए। बरामद इंजेक्शनों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 4.50 लाख रुपये बताई गई है।
इतनी बड़ी संख्या में इंजेक्शनों का एक किराए के मकान में मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि इनके जरिए लंबे समय से संगठित तरीके से सप्लाई का काम किया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितनी मात्रा में इंजेक्शन बेचे हैं और इस कारोबार से किन-किन लोगों को जोड़ा गया था।
आगरा से मुरैना तक फैले नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस अवैध कारोबार की सप्लाई चेन खंगाल रही है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि आगरा में आरोपियों को ये इंजेक्शन कौन उपलब्ध कराता था, उन्हें किन माध्यमों से मुरैना लाया जाता था और स्थानीय स्तर पर इनकी सप्लाई किन लोगों तक की जाती थी।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस कारोबार में अन्य मेडिकल स्टोर संचालक या बिचौलिए भी शामिल हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच के जरिए नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर फिर उठे सवाल
मुरैना में बड़ी संख्या में नशीले इंजेक्शनों की बरामदगी ने युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय जरूरत के बजाय नशे के लिए किया जाना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। वहीं बिना वैध अनुमति और आवश्यक चिकित्सकीय नियंत्रण के ऐसी दवाओं की बिक्री लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
फिलहाल कोतवाली थाना पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश और अवैध सप्लाई के स्रोतों की जांच में जुटी है।
