नई दिल्ली,
नई दिल्ली(HRIDAY STAMBH);
चार राज्यों के विधान परिषद चुनाव में एनडीए ने 16 सीटों पर दर्ज की जीत, इंडिया गठबंधन को मिली 9 सीटें; नागपुर में कांग्रेस और वाराणसी में सपा की सफलता को महुआ मोइत्रा ने बताया भविष्य की राजनीति का संकेत
नई दिल्ली। देश के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर सियासी बहस तेज कर दी है। कुल 28 सीटों पर हुए चुनाव में भले ही भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हों, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर विपक्ष की जीत ने सत्तारूढ़ गठबंधन के सामने राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर महाराष्ट्र की नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस की जीत और उत्तर प्रदेश में वाराणसी की दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी के कब्जे ने विपक्ष को नई ऊर्जा दी है।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने नागपुर और वाराणसी के चुनाव परिणामों को केंद्र की राजनीति के लिए एक संकेत बताते हुए प्रधानमंत्री पर तंज कसा। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इन चुनाव परिणामों के मायने तलाशे जाने लगे हैं।
महुआ मोइत्रा का पीएम मोदी पर तीखा हमला
एमएलसी चुनाव के अंतिम परिणामों के बाद महुआ मोइत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने नागपुर में कांग्रेस की जीत और वाराणसी में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि इन नतीजों को महज कुछ विधान परिषद सीटों का चुनाव समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
महुआ मोइत्रा का इशारा खासतौर पर वाराणसी की ओर था, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है। यहां शिक्षक और स्नातक दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज कर विपक्ष की राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया।
इसी तरह महाराष्ट्र के नागपुर में कांग्रेस की जीत भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रमुख केंद्र माना जाता है और यह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी गृह क्षेत्र है। ऐसे में यहां कांग्रेस की जीत को भाजपा के लिए एक राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
28 सीटों में एनडीए को 16, इंडिया गठबंधन को 9 सीटें
चार राज्यों की कुल 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव परिणामों में एनडीए ने बढ़त बनाए रखी। हालांकि विपक्षी दलों ने भी कई महत्वपूर्ण सीटों पर जीत हासिल की।
पार्टीवार परिणाम इस प्रकार रहे—
भाजपा- 13 सीटें
समाजवादी पार्टी- 5 सीटें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)- 2 सीटें
शिवसेना- 1 सीट
जनता दल (सेक्युलर)- 1 सीट
कांग्रेस- 1 सीट
जनता दल (यूनाइटेड)- 1 सीट
राष्ट्रीय जनता दल- 1 सीट
जन सुराज- 1 सीट
निर्दलीय- 2 सीटें
गठबंधन के हिसाब से तस्वीर
एनडीए- 16 सीटें
इंडिया गठबंधन- 9 सीटें
अन्य- 3 सीटें
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि एनडीए ने कुल सीटों में बढ़त हासिल की, लेकिन विपक्ष ने भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
नागपुर में कांग्रेस की जीत ने बढ़ाई भाजपा की चिंता
महाराष्ट्र की नागपुर स्नातक विधान परिषद सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी की जीत को इन चुनावों के सबसे चर्चित परिणामों में गिना जा रहा है। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहाले को पराजित किया।
नागपुर राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से भाजपा तथा आरएसएस के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में यहां कांग्रेस की जीत ने भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा की है।
इस परिणाम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नागपुर महाराष्ट्र की सत्ता की राजनीति में प्रभावशाली स्थान रखता है। यहां मिली हार ने विपक्ष को भाजपा के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में भी मुकाबला करने का राजनीतिक संदेश देने का अवसर दिया है।
वाराणसी में सपा का दो सीटों पर कब्जा, पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में विपक्ष की मजबूत दस्तक
उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों में वाराणसी की दोनों विधान परिषद सीटों पर समाजवादी पार्टी की जीत ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है।
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की, जबकि वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा विजयी रहे।
वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। ऐसे में यहां दोनों सीटों पर सपा की सफलता को विपक्ष अपनी राजनीतिक मजबूती के तौर पर पेश कर रहा है।
हालांकि विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग आम विधानसभा चुनावों से अलग होता है, लेकिन राजनीतिक दल इन परिणामों को अपने संगठनात्मक प्रभाव और जनाधार के संकेत के रूप में जरूर देखते हैं।
कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन का दबदबा
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद विधान परिषद चुनाव में पार्टी को बड़ा झटका लगा। राज्य की चारों सीटों पर भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने जीत हासिल की।
भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एक सीट जनता दल (सेक्युलर) के खाते में गई। इस परिणाम ने राज्य में कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती खड़ी की है।
बिहार में जन सुराज ने खोला खाता
बिहार के चुनाव परिणामों में भी कई दिलचस्प राजनीतिक समीकरण सामने आए। यहां भाजपा और जदयू गठबंधन ने अपनी स्थिति मजबूत रखी, जबकि राष्ट्रीय जनता दल को भी एक सीट पर सफलता मिली।
सबसे ज्यादा चर्चा जन सुराज पार्टी की जीत को लेकर रही। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज कर पार्टी को विधान परिषद में पहली सफलता दिलाई।
इसके अलावा बिहार में दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की। इससे साफ है कि विधान परिषद के चुनाव में स्थापित राजनीतिक दलों के अलावा अन्य उम्मीदवारों ने भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई।
क्या एमएलसी चुनाव के नतीजे बदलेंगे राष्ट्रीय राजनीति का माहौल?
इन चुनाव परिणामों ने भाजपा और विपक्ष दोनों को अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का आकलन करने का अवसर दिया है। एनडीए ने 28 में से 16 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त हासिल की है। दूसरी ओर इंडिया गठबंधन को 9 सीटें मिली हैं।
लेकिन नागपुर और वाराणसी जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विपक्ष की जीत ने चुनाव परिणामों को चर्चा का विषय बना दिया है।
महुआ मोइत्रा का हमला भी इसी राजनीतिक परिदृश्य से जुड़ा है। विपक्ष इन नतीजों के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी मुकाबला संभव है और राजनीतिक परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं।
हालांकि इन एमएलसी चुनावों के आधार पर आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों के परिणामों का सीधा अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सीमित और विशिष्ट होता है। फिर भी इन परिणामों ने विपक्ष को भाजपा के खिलाफ राजनीतिक हमला तेज करने का एक नया मुद्दा जरूर दे दिया है।
फिलहाल चुनावी आंकड़ों में एनडीए आगे है, लेकिन नागपुर और वाराणसी की जीत ने विपक्ष को जश्न मनाने और प्रधानमंत्री मोदी को घेरने का मौका दे दिया है। अब देखना होगा कि महुआ मोइत्रा की यह राजनीतिक चेतावनी सत्ता पक्ष के लिए कितना बड़ा संदेश साबित होती है।

