धार
सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
धार (NEWS UPDATE): ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील भोजशाला परिसर (Bhojshala Dhar) में शनिवार को एक ऐसा अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया, जिसने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
चाक-चौबंद सुरक्षा घेरे के बावजूद किसी अज्ञात व्यक्ति या समूह ने भोजशाला के गर्भगृह में मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा स्थापित कर दी। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना की भनक परिसर में तैनात सुरक्षा एजेंसियों को कानों-कान नहीं हुई।
दोपहर में रखी गई प्रतिमा, शाम तक बना रहा रहस्य
मामला शाम को एएसआई के संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रतिमा को हटवा दिया। घटना ऐसे समय सामने आई, जब हाल ही में उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला को सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने और मुख्यमंत्री द्वारा यहां ‘सरस्वती लोक’ एवं राजा भोज शोध संस्थान की घोषणा के बाद परिसर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। ऐसे माहौल में प्रतिमा की अचानक स्थापना और फिर उसे हटाए जाने की घटना ने नई बहस छेड़ दी है।
दोपहर भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम थी। इसी दौरान किसी व्यक्ति द्वारा गर्भगृह में अष्टधातु निर्मित मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित कर दी गई। प्रतिमा के समक्ष पुष्प, अक्षत और पूजन सामग्री भी रखी गई थी, जिससे स्पष्ट था कि स्थापना के बाद विधिवत पूजा-अर्चना भी की गई।
सबसे बड़ा सवाल: बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा भेदकर गर्भगृह तक कैसे पहुंची प्रतिमा?
भोजशाला की संवेदनशीलता को देखते हुए यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। पूरे परिसर को बहुस्तरीय सुरक्षा में रखा गया है:
बाहरी घेरा: बाहरी हिस्से में स्थानीय पुलिस चौकी और सशस्त्र बल तैनात रहते हैं, जो आने-जाने वालों पर नजर रखते हैं।
आंतरिक घेरा: परिसर के अंदरूनी हिस्से और गर्भगृह के आसपास की निगरानी की जिम्मेदारी एएसआई (ASI) के विशेष सुरक्षा गार्ड्स के पास होती है।
इन तमाम दावों के बावजूद अष्टधातु जैसी भारी धातु की प्रतिमा का अंदर पहुंच जाना और वहां गोपनीय तरीके से पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जाना, एक बड़ी सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है।
Dhar Bhojshala Security Breach
Dhar Bhojshala Vagdevi Statue
