दतिया
जिला कार्यकारिणी भंग होने से कार्यकर्ताओं में उपजा आक्रोश
दतिया (HRIDAY STAMBH): दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अंदरूनी असंतोष खुलकर सतह पर आ गया है। चुनाव में मिली हार के बाद शीर्ष नेतृत्व द्वारा पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिए जाने से सेवढ़ा और भांडेर विधानसभा के पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता सबसे ज्यादा आहत नजर आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं का एक ही बड़ा सवाल है — “अगर दतिया विधानसभा में भीतरघात हुआ, तो उसकी सजा सेवढ़ा और भांडेर को क्यों दी जा रही है?”
”हमारी क्या गलती थी?” — जमीनी कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल
भाजपा नेतृत्व के इस फैसले को सेवढ़ा और भांडेर के स्थानीय पदाधिकारी सहज रूप से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। यद्यपि खुलकर कोई सामने नहीं आ रहा, लेकिन अंदर ही अंदर नाराजगी और अंतर्कलह साफ दिखाई दे रही है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है:
“अगर दतिया में भीतरघात हुआ है तो उसके लिए वहां के पदाधिकारी जिम्मेदार हैं। उपचुनाव की जिम्मेदारी जिन 6 मंडलों पर थी, वे केवल दतिया क्षेत्र के थे। ऐसे में बिना किसी ठोस कारण के पूरे जिले के साथ-साथ दो अन्य विधानसभाओं की टीमों को भंग करना वफादार कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने जैसा है।”
पूर्व जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा की सफाई: “सबूत हैं तो सामने लाएं”
इस बीच भंग किए गए जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा “हमने पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के साथ शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम किया है। ऑडियो-वीडियो के माध्यम से भ्रम फैलाया जा रहा है कि हमने भीतरघात किया। अगर सबूत हैं तो सामने लाए जाएं। बिना पत्र और बिना कारण बताए कार्यकारिणी भंग करना कार्यकर्ताओं को हताश करना है। वर्षों की मेहनत का ये परिणाम उचित नहीं है।”
राजनीतिक विश्लेषण: कड़ा संदेश या मजबूरी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व ने यह कदम भविष्य में अनुशासनहीनता और भीतरघात को रोकने के लिए ‘सख्त संदेश’ देने के उद्देश्य से उठाया है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के खेमे से जुड़े पदाधिकारियों को हटाकर संगठन नए सिरे से कसावट लाना चाहता है।
हालांकि, इस एकतरफा फैसले से सेवढ़ा और भांडेर के वफादार कैडर में भारी निराशा है। अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल नया संगठन खड़ा करने की है, बल्कि भांडेर और सेवढ़ा के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को फिर से एकजुट करने की भी होगी।
