डबरा में 88 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट पर उठे सवाल

डबरा/भितरवार

डबरा

पाइप की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों में लापरवाही के आरोप, नपा उपाध्यक्ष ने मंत्री से मांगी उच्चस्तरीय तकनीकी जांच

डबरा। शहर में करीब 88 करोड़ रुपए की लागत से चल रहे सीवर प्रोजेक्ट की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सीवर लाइन में इस्तेमाल हो रहे पाइपों की गुणवत्ता, उनके साइज, निर्माण सामग्री और सड़कों की खुदाई के बाद मरम्मत में हो रही देरी को लेकर जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में नाराजगी है। मामले को लेकर नगर पालिका उपाध्यक्ष सत्येंद्र दुबे ने नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र भेजकर परियोजना की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

उपाध्यक्ष ने पत्र में सीवर लाइन में उपयोग किए जा रहे पाइपों की गुणवत्ता और क्षमता की जांच के साथ निर्माण में इस्तेमाल सामग्री का तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में निर्माण गुणवत्ता की नियमित निगरानी जरूरी है। वहीं पार्षद हैप्पी सरदार भी कार्यप्रणाली को लेकर विरोध दर्ज करा चुके हैं।

विधायक भी उठा चुके हैं निगरानी का मुद्दा

डबरा विधायक सुरेश राजे भी इससे पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीवर कार्य की सक्षम अधिकारियों से लगातार मॉनिटरिंग कराने की मांग कर चुके हैं। लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच नगर पालिका स्तर से ठेका कंपनी पर कार्रवाई भी की गई है। सीएमओ के अनुसार कार्य में लापरवाही और देरी के चलते संबंधित कंपनी पर अब तक 17.64 लाख रुपए से अधिक की पेनल्टी लगाई जा चुकी है।

30 वार्डों में 250 किमी पाइपलाइन

डबरा शहर के सभी 30 वार्डों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने वाली इस परियोजना के तहत करीब 250 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जानी है। शहर में जगह-जगह सड़क और गलियों की खुदाई के बाद समय पर मरम्मत नहीं होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

इतने बड़े और करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट में पाइप और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच अब तकनीकी जांच की मांग जोर पकड़ रही है। लोगों का कहना है कि पाइपों की मजबूती और क्षमता की स्वतंत्र लैब से जांच होने के साथ खुदी सड़कों की मानकों के अनुरूप स्थायी मरम्मत भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अब निगाह इस बात पर है कि शासन स्तर से डबरा के इस महत्वपूर्ण सीवर प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच को लेकर क्या कदम उठाया जाता है।

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