मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: मक्का पर हूती हमले की नापाक कोशिश के बाद एक्शन में अमेरिका, सऊदी अरब को मिलेंगे 48 घातक F-35 स्टील्थ जेट्स!

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वाशिंगटन/रियाद।

पश्चिम एशिया में भड़कती युद्ध की आग और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बढ़ते दुस्साहस के बीच अमेरिकी प्रशासन ने एक ऐसा रणनीतिक फैसला लिया है, जिसने वैश्विक रक्षा जगत में हलचल मचा दी है। अमेरिका ने सऊदी अरब को दुनिया का सबसे आधुनिक और मारक माना जाने वाला 48 F-35 ‘लाइटनिंग-2’ स्टील्थ फाइटर जेट बेचने के मेगा रक्षा सौदे को हरी झंडी दे दी है। लगभग 24.3 अरब डॉलर (दो लाख करोड़ भारतीय रुपये से अधिक) के इस भारी-भरकम सौदे को ऐसे नाजुक समय पर मंजूरी दी गई है, जब क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है।

यह ऐतिहासिक फैसला उस वक्त सामने आया है,

जब महज दो दिन पहले यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के अति-संवेदनशील और पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाकर ड्रोन हमले की नाकाम कोशिश की गई। हालांकि, सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने इस हमले को वक्त रहते हवा में ही नाकाम कर दिया, लेकिन इस दुस्साहस ने रियाद और वाशिंगटन दोनों के सब्र का बांध तोड़ दिया। इसके अलावा, हाल के महीनों में सऊदी अरब के प्रमुख तेल बुनियादी ढांचों पर भी ईरान और उसके छद्म (प्रॉक्सी) संगठनों की ओर से हमले तेज हुए हैं। इस गंभीर घटनाक्रम के तुरंत बाद वाशिंगटन द्वारा F-35 की इस बिक्री को दी गई रफ्तार को सीधा संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका अपने खाड़ी सहयोगियों की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला।

वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग ने आधिकारिक बयान जारी कर इस बहुचर्चित सौदे की पुष्टि की।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यद्यपि सऊदी अरब नाटो (NATO) का सदस्य देश नहीं है, फिर भी वह खाड़ी क्षेत्र की राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का तर्क है कि सऊदी अरब की रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाना वाशिंगटन के अपने रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुकूल है।

उधर, रियाद स्थित सऊदी दूतावास ने वाशिंगटन के इस कदम का खुलकर स्वागत किया।

सऊदी प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह ऐतिहासिक रक्षा समझौता दोनों देशों के बीच दशकों पुराने सुरक्षा और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। रियाद ने साफ किया कि F-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के अग्रिम लड़ाकू विमान मिलने से सऊदी वायु सेना की हमलावर और रक्षात्मक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। दुश्मन के उन्नत से उन्नत रडार को चकमा देकर उसके ठिकाने में सीधे तबाही मचाने वाला यह स्टील्थ फाइटर रियाद को पूरे मध्य पूर्व में निर्विवाद हवाई श्रेष्ठता प्रदान करेगा।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अरब द्वारा इतने महंगे फाइटर जेट्स की खरीद केवल एक सैन्य सौदा नहीं, बल्कि क्षेत्र का नया राजनीतिक समीकरण है।

ईरान के साथ जारी परोक्ष युद्ध, लाल सागर में समुद्री जहाजों पर हूती हमलों और घरेलू ऊर्जा ठिकानों पर बढ़ते खतरे को देखते हुए सऊदी अरब अब रक्षात्मक नीति छोड़ आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। 48 F-35 जेट्स का यह बेड़ा सऊदी अरब को क्षेत्र का सबसे शक्तिशाली वायु बेड़ा बनाने जा रहा है, जिससे तेहरान और हूती विद्रोहियों के लिए भविष्य में किसी भी तरह की हिमाकत करना बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है।

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