BRICS सम्मेलन: भोपाल नगर निगम के सामने 1500 कुत्तों के अस्थायी प्रबंधन की बड़ी चुनौती

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भोपाल में शेल्टर होम ‘जीरो’: ABC सेंटरों ने बजट और जगह की कमी से खड़े किए हाथ

भोपाल (NEWS UPDATE):आगामी 5 से 8 अगस्त तक आयोजित होने वाले तृतीय ब्रिक्स कल्चर वर्किंग ग्रुप (CWG) और संस्कृति मंत्रियों की बैठक की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। लेकिन, VVIP मेहमानों के स्वागत के बीच भोपाल नगर निगम (BMC) के सामने एक नई और बड़ी प्रशासनिक आफत खड़ी हो गई है। VVIP रूट्स को व्यवस्थित करने के साथ-साथ अब नगर निगम पर 1500 आवारा कुत्तों को पकड़कर 8 दिनों तक सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आ गई है।

VVIP रूट्स से अतिक्रमण और मवेशी हटाने की मुहिम तेज

ब्रिक्स सम्मेलन के मद्देनजर नगर निगम प्रशासन एयर पोर्ट से लेकर पॉलीटेक्निक, बोट क्लब, न्यू मार्केट और एमपी नगर जैसे प्रमुख VVIP रूट्स को व्यवस्थित करने में जुटा है। यहां से अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ आवारा मवेशियों और कुत्तों को साफ करने की कवायद चल रही है।

भोपाल निगम आयुक्त संस्कृति जैन के अनुसार, ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान नियमों का पालन करते हुए VVIP रूट्स का प्रबंधन और आवारा पशुओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

ब्रीडिंग सीजन में कुत्तों की टेरिटरी बदलना सुप्रीम कोर्ट का उल्लंघन!

पशु चिकित्सकों के मुताबिक, यह सीजन कुत्तों के ब्रीङ्क्षडग का है, जिससे वे आजकल अधिक आक्रामक हैं। आयोजन के दौरान आठ दिनों के लिए कुत्तों की टेरिटरी बदलना सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है। नई जगह पर कुत्तों के लिए सर्वाइवल का संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि भौतिक, शारीरिक और मानसिक तनाव के कारण उनके प्राणों पर जोखिम होगा।

शेल्टर होम का अभाव और ABC सेंटरों की बेबसी

शहर में एक भी शेल्टर होम मौजूद नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट, राज्य व केंद्र सरकारें वर्षों से शेल्टर होम बनाने के लिए निर्देशित कर रही हैं। इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर में शेल्टर होम हैं, जबकि भोपाल में नहीं है। अभी भी केवल टेंडर जारी करने की तैयारी है।

शहर में अभी कुल तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं, जिनकी क्षमता 500 से भी कम कुत्तों की है। यदि यहां कुत्ते रखे गए तो नसबंदी कार्यक्रम प्रभावित होगा। 1500 कुत्तों को रखने कम से कम 25,000 से 30,000 वर्ग फीट जगह की जरूरत है। एबीसी सेंटरों का संचालन कर रही निजी संस्थाओं ने भोजन और देखभाल के फंड की कमी का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए हैं।

 

 

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