नई दिल्ली
स्पेयर पार्ट्स की मांग में 50% उछाल
रास्ते में अचानक बंद हो रहे दोपहिया और चार पहिया वाहन
नई दिल्ली (NEWS UPDATE):देश में ई-20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही पुरानी गाड़ियों में तकनीकी खराबी और स्पेयर पार्ट्स की मांग में 50% का भारी उछाल देखा गया है।
देशभर में पिछले एक महीने के दौरान चार पहिया और दोपहिया वाहनों में तकनीकी खराबी के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। इस तकनीकी संकट का सीधा असर ऑटो स्पेयर पार्ट्स के कारोबार पर पड़ा है,
जहां कार्बोरेटर, पिस्टन, वाल्व, एयर फिल्टर और वायरिंग सेट जैसे मुख्य पुर्जों की मांग में करीब 50 प्रतिशत तक का भारी उछाल देखा गया है।
अचानक बढ़ी इस मांग के चलते जहां ऑटो स्पेयर मार्केट में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है, वहीं दूसरी ओर बाजार में डुप्लीकेट (नकली) स्पेयर पार्ट्स की बिक्री भी तेजी से बढ़ गई है, जिसने वाहन मालिकों की चिंताओं को दोगुना कर दिया है।
ऑटोमोबाइल स्पेयर मार्केट के मौजूदा रुझानों के मुताबिक, इन दिनों आम वाहन चालकों की तुलना में मैकेनिक अधिक संख्या में बाजार पहुंच रहे हैं। ये मैकेनिक मुख्य रूप से बाइक और स्कूटी के कार्बोरेटर, पिस्टन, वाल्व, फिल्टर और वायरिंग सेट की थोक व फुटकर खरीदारी कर रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट और स्थानीय गैराज संचालकों के अनुसार, हाल के दिनों में ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की आपूर्ति और उपयोग बढ़ने के बाद से खासकर पुराने वाहनों में इंजन संबंधी गंभीर दिक्कतें सामने आने लगी हैं।
कई दोपहिया वाहन चलते-चलते अचानक बंद हो रहे हैं, उनके स्टार्टिंग में समस्या आ रही है और इंजन की ओवरऑल परफॉर्मेंस व पिकअप में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
BS-6 श्रेणी के आधुनिक वाहनों में भी आ रही तकनीकी खराबी
यह समस्या केवल पुराने वाहनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नए मानकों वाले वाहनों को भी प्रभावित कर रही है। स्पेयर पार्ट्स के प्रतिष्ठित कारोबारी जसपाल सिंह के अनुसार, बीएस-6 (BS-VI) श्रेणी के कई आधुनिक दोपहिया वाहनों में भी खराबी की लगातार शिकायतें आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि इन वाहनों में अत्यधिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और सेंसर्स लगे होते हैं।यदि ईंधन की गुणवत्ता में थोड़ा भी बदलाव या मिलावट होती है, तो इन सेंसर्स और फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम पर सीधा विपरीत असर पड़ता है। ऑटो व्यापारियों ने मांग की है कि पेट्रोल में एथेनॉल के तय अनुपात के साथ-साथ अन्य संभावित मिलावटों की भी उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, स्थानीय मैकेनिक अनवर का कहना है कि बीएस-6 बाइक और स्कूटी में आ रही तकनीकी खराबियां बेहद जटिल होती हैं, जिन्हें सामान्य गैराज में ठीक करना मुमकिन नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में वाहन मालिकों को विवश होकर अधिकृत सर्विस सेंटर का रुख करना पड़ता है, जहां जांच और मरम्मत का खर्च सामान्य से कई गुना अधिक आता है, जिससे जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है।
5 से 6 वर्ष पुराने इंजनों पर सबसे गंभीर असर क्यों?
मैकेनिक और इंजीनियरिंग विशेषज्ञों ने इस पूरे घटनाक्रम पर तकनीकी विश्लेषण साझा किया है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सबसे घातक प्रभाव मुख्य रूप से पांच से छह वर्ष या उससे अधिक पुराने इंजनों पर देखा जा रहा है।
हीवेट पॉलिटेक्निक में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रभारी एम.पी. सिंह के अनुसार, पुराने वाहन और उनके इंजन मूल रूप से 100% शुद्ध पेट्रोल (Pure Gasoline) पर चलने के लिए डिजाइन किए गए थे। ऐसे इंजनों में जब उच्च मात्रा वाले एथेनॉल मिश्रित ईंधन (जैसे E-20) का उपयोग किया जाता है, तो कई प्रकार की रासायनिक और यांत्रिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
प्रोफेसर एम.पी. सिंह ने इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण समझाते हुए बताया कि एथेनॉल की प्रकृति ‘हाइग्रोस्कोपिक’ (Hygroscopic यानी नमी सोखने वाली) होती है। यह वातावरण से हवा की नमी को अपनी ओर खींचता है, जिससे फ्यूल टैंक के भीतर पानी की मात्रा बढ़ जाती है।
ईंधन में पानी का यह मिश्रण फ्यूल टैंक, कार्बोरेटर और धातु के अन्य आंतरिक हिस्सों में तेजी से जंग (Rusting) पैदा करता है। इसके अतिरिक्त, एथेनॉल के रासायनिक प्रभाव के कारण इंजन के भीतर लगे रबर के होज़, प्लास्टिक के पुर्जे और गास्केट जल्दी गलकर खराब हो जाते हैं। इससे इंजन असामान्य रूप से अधिक गर्म (Overheating) होने लगता है और वाहन के माइलेज में भारी कमी आ जाती है।
E-20 Petrol Vehicle Problems
