भाेपाल
सज्जन सिंह वर्मा बोले- ‘समय आने दो…’
भोपाल (Political NEWS UPDATE): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर की गई ‘दो टके’ की टिप्पणी पर सियासत गरमा गई है। सज्जन सिंह वर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि ‘पर्ची वाले मुख्यमंत्री’ से इसी भाषा की उम्मीद थी, वक्त आने पर सब बता देंगे।
इसके साथ ही मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर की गई एक कथित टिप्पणी के बाद प्रदेश का राजनीतिक पारा हाई है।
सीएम मोहन यादव के “दो टके का प्रदेशाध्यक्ष” वाले बयान पर कांग्रेस ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस बयान के बाद भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
सीएम मोहन यादव ने शाजापुर में क्या कहा था?
दरअसल, यह पूरा विवाद शाजापुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जीतू पटवारी पर तंज कसते हुए कहा:
“जीतू पटवारी मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ देख रहे हैं। लेकिन कोई उन्हें याद दिलाए कि जो नेता अपनी खुद की विधानसभा सीट नहीं बचा पाया, और प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए अपने लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस का प्रत्याशी तक खड़ा नहीं करवा पाया, वह सरकार बनाने के सपने देख रहा है। तुम्हारे जैसे 20 साल और चले जाएं, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की दाल गलने वाली नहीं है।”
पूर्वमंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने क्या कहा ?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री के बयान को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि जीतू भाई आप बुरा मत मानना। मुख्यमंत्री ने आज सिद्द कर दिया कि पर्ची वाले मुख्यमंत्री से इसी तरह की शब्दावली की उम्मीद की जा सकती है। प्रदेश के मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
वर्मा ने इसे “घटिया शब्दावली” बताते हुए कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी और अपमानजनक भाषा लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि वक्त का इंतजार करते हैं। वक्त जब आएगा तो खुद पता चल जाएगा कि कौन कितने टके का आदमी है ये हम सब मिलकर सिद्द कर देंगे।
सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि कांग्रेस इस तरह की भाषा का समर्थन नहीं करती और मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता और “वक्त सबका आता है”, इसलिए नेताओं को संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस पर क्या कहा
कमलनाथ ने इस बयानबाजी और मुख्यमंत्री के रवैये की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया (X) पर भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि:
संवैधानिक पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए: मुख्यमंत्री जैसे ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की अमर्यादित और व्यक्तिगत बयानबाजी से बचना चाहिए। राजनीति में भाषा का संयम सबसे जरूरी है।
मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप: कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत कीचड़ उछालने और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने के बजाय प्रदेश के असल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
घोटालों और विकास पर घेरा: उन्होंने हमला बोलते हुए कहा कि सरकार को नर्सिंग कॉलेज घोटाला, व्यापमं और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय महाकाल कॉरिडोर और छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े विकास कार्यों की शुरुआत हुई थी, जबकि मौजूदा सरकार सिर्फ जुबानी जंग में उलझी हुई है।
कमलनाथ के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि प्रदेश अध्यक्ष का अपमान पूरी कांग्रेस पार्टी का अपमान है और इसके लिए मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए।
