मॉस्को:
युद्ध और शांति दोनों समय में लागू रहेगा समझौता, सैन्य सहयोग और लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे
मॉस्को:भारत और रूस के बीच रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती देते हुए RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) समझौता किया गया है। इस महत्वपूर्ण रक्षा समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर अधिकतम 3,000 सैनिकों की तैनाती कर सकेंगे। इसके अलावा 10 सैन्य विमानों और 5 युद्धपोतों की तैनाती की भी अनुमति होगी। यह समझौता सैन्य इकाइयों, नौसेना के जहाजों और वायुसेना के विमानों की आपसी तैनाती के लिए स्पष्ट नियम और ढांचा प्रदान करता है। खास बात यह है कि यह समझौता युद्ध और शांति—दोनों परिस्थितियों में लागू रहेगा, जिससे दोनों देशों की सैन्य तैयारियों को लचीलापन मिलेगा।
लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशन में मिलेगा फायदा
इस समझौते के तहत भारत और रूस एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, बंदरगाहों और एयर बेस का उपयोग कर सकेंगे। इससे लंबी दूरी के सैन्य अभियानों में समय और लागत दोनों की बचत होगी। साथ ही, संयुक्त अभ्यास और आपात स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देना आसान हो जाएगा। यह समझौता फिलहाल 5 वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे बाद में आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच भरोसे और सामरिक साझेदारी को और गहरा करेगा।
ईरान में चल रहे युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच यह समझौता और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे समय में भारत और रूस का यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा संतुलन में अहम भूमिका निभा सकता है। इस समझौते से भारत की रणनीतिक पहुंच आर्कटिक क्षेत्र तक बढ़ सकती है, जो भविष्य की सैन्य और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, रूस के साथ मजबूत संबंध भारत की रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ करेंगे।
