नई दिल्ली
दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने से प्रस्ताव खारिज, पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े
संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में पेश महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो सका। मतदान में कुल 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया, जिसमें 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने परिणाम घोषित करते हुए कहा कि संविधान संशोधन के लिए जरूरी बहुमत प्राप्त नहीं होने के चलते विधेयक गिर गया है। इसके बाद सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
दिनभर चली चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसके विभिन्न प्रावधानों और प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।
विधेयक के गिरने पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने का महत्वपूर्ण प्रयास था, लेकिन विपक्ष के सहयोग के अभाव में इसे पारित नहीं कराया जा सका। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगी।
वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर समर्थन के बावजूद विपक्ष ने शर्तों के जरिए इसे कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान संविधान में नहीं है और सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाएगी।
चर्चा के दौरान अमित शाह ने लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत तक वृद्धि के प्रस्ताव का भी जिक्र किया और परिसीमन के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की आवश्यकता बताई।
विधेयक पर बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार की मंशा और प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने इसे प्रतिनिधित्व संतुलन और संवैधानिक सुधार की दिशा में अहम पहल बताया।
