पटना
प्रशासनिक चुस्ती और चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्ष व स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल; शहर में बुनियादी मुद्दों पर भी चर्चा तेज।
पटना (NEWS UPDATE):राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल सीट बांकीपुर विधानसभा में उप-चुनाव की सरगर्मियों के बीच राजनीतिक और सामाजिक पारा चढ़ गया है। शहर के पुलिस लाइन क्षेत्र के मुख्य मार्ग पर लगे चुनावी गेट्स और होर्डिंग्स को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासियों और राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा इन पोस्टरों व द्वारों पर धर्म और जाति आधारित पहचान के आधार पर वोट मांगने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
पुलिस लाइन के सामने लगे विवादित गेट्स
स्थानीय लोगों का दावा है कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पुलिस लाइन इलाके के ठीक सामने पिछले कई दिनों से विशेष धार्मिक संकेतों और रंगों वाले स्वागत द्वार बने हुए हैं। आरोप है कि इन द्वारों के माध्यम से मतदाताओं को धार्मिक व जातीय आधार पर लामबंद करने का प्रयास किया जा रहा है।
नागरिकों का कहना है कि इतने संवेदनशील इलाके में इस तरह के पोस्टर और गेट बने होने के बावजूद चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है, जिससे आचार संहिता के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।
जाति और धर्म के समीकरण पर घिरी राजनीति
बांकीपुर सीट को लेकर पटना के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर-शोर से चल रही है कि यहाँ चुनाव केवल विकास या स्थानीय मुद्दों पर न होकर जातीय और धार्मिक समीकरणों के इर्द-गिर्द सिमट गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि पारंपरिक रूप से जातीय निष्ठाओं के लिए जाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब धार्मिक प्रतीकों और नारों का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
प्रशासन और चुनाव आयोग के रुख का इंतजार
आचार संहिता के उल्लंघन के आरोपों के बीच अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग और स्थानीय पुलिस प्रशासन इन विवादित गेट्स और पोस्टरों पर क्या संज्ञान लेता है। बांकीपुर के मतदाता इस उप-चुनाव में विकास के मुद्दों को चुनते हैं या पारंपरिक जातीय व धार्मिक समीकरणों को, यह तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे।
