नई दिल्ली,
नई दिल्ली(HRIDAY STAMBH);
राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था संभालने वाली ‘दिल्ली पुलिस’ का एक बेहद हैरान करने वाला और अभूतपूर्व रूप देखने को मिला है। गांधी नगर थाने में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच हुए तीखे विवाद के बाद मामला शांत होने के बजाय और अधिक गरमा गया है। सोमवार को इतिहास में पहली बार ऐसा नजारा देखने को मिला, जब सैकड़ों की संख्या में दिल्ली पुलिसकर्मी अपनी वर्दी और सम्मान के हक में दिल्ली पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर खुद धरने और प्रदर्शन पर उतर आए।
विवाद की मुख्य वजह: ACP मानसवी वशिष्ठ का ट्रांसफर
इस पूरे गतिरोध और आक्रोश की मुख्य वजह गांधी नगर इलाके में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई हिंसक झड़प तथा उसके बाद का प्रशासनिक फैसला है। विवाद के तूल पकड़ने पर पुलिस प्रशासन द्वारा सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मानसवी वशिष्ठ का ट्रांसफर कर दिया गया।
प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों का साफ कहना है कि वकीलों के दबाव में आकर एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी पर कार्रवाई की गई है, जो पूरी तरह से अनुचित है। पुलिस बल में यह संदेश गया है कि ऑन-ड्यूटी अधिकारियों की सुरक्षा और उनके मनोबल की अनदेखी की जा रही है।
कमिश्नर के साथ 40 मिनट की बैठक बेनतीजा
तनाव को बढ़ता देख दिल्ली पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) ने प्रदर्शनकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई।
यह बैठक करीब 40 मिनट तक चली, जिसमें शीर्ष अधिकारियों ने समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया।हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के आश्वासनों से प्रदर्शनकारी संतुष्ट नहीं हुए। बैठक खत्म होते ही बाहर मौजूद जवानों ने एक बार फिर नारेबाजी शुरू कर दी और अपनी मांगों (ACP के ट्रांसफर को रद्द करने व निष्पक्ष जांच) पर अड़े रहे।
इतिहास का अनोखा और दुर्लभ मामला
आमतौर पर विरोध-प्रदर्शनों को रोकने, बैरिकेडिंग करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस का खुद इस तरह सड़कों पर उतरना भारतीय प्रशासनिक इतिहास में बेहद दुर्लभ है।
मनोबल और सम्मान की लड़ाई: प्रदर्शन कर रहे जवानों का कहना है कि यह केवल एक ट्रांसफर का मुद्दा नहीं है, बल्कि ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और उनके मनोबल से जुड़ा मामला है।
मुख्यालय के बाहर भारी हलचल: पुलिस मुख्यालय के बाहर जवानों की भीड़, उनके हाथ में तख्तियां और उनके द्वारा लगाए जा रहे नारों ने प्रशासनिक महकमे से लेकर आम जनता तक सबका ध्यान खींचा है।
राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर इस गतिरोध का असर न पड़े, इसे लेकर गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। एक तरफ जहां वकील समुदाय अपने रुख पर कायम है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसकर्मियों का यह अभूतपूर्व प्रदर्शन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है

