रीवा
Collector के आश्वासन पर देशराज ने खत्म किया अनशन
रीवा (NEWS UPDATE): जिले के गुढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम बेला से सामने आए चर्चित देशराज मिश्रा जल सत्याग्रह मामले में बड़ा प्रशासनिक अपडेट आया है। अपनी निजी कृषि भूमि से गुजर रही हाईटेंशन टावर लाइन और उचित मुआवजे की मांग को लेकर पानी से भरे गड्ढे में 88 घंटे से अनशन पर बैठे युवक देशराज मिश्रा (Deshraj Mishra Protest) ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए देर रात करीब 11:30 बजे कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी खुद प्रशासनिक टीम के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। उनके साथ एसडीएम सुधाकर सिंह, तहसीलदार अरुण यादव और थाना प्रभारी पुष्पेंद्र यादव भी मौजूद रहे।
Collector ने सुनीं देशराज मिश्रा की मांगें
आधी रात को अनशन स्थल पहुंचे कलेक्टर ने देशराज मिश्रा से सीधी बातचीत की और उनके दस्तावेजों व शिकायतों को विस्तार से समझा। बातचीत के दौरान देशराज ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए
देशराज ने आरोप लगाया कि उनकी निजी जमीन पर बिना पर्याप्त नोटिस या सहमति के हाईटेंशन लाइन और टावर लगाने का काम शुरू किया गया। कृषि भूमि के इस्तेमाल और टावर लगाने के एवज में नियमानुसार मुआवजा नहीं दिया गया।
युवक ने आरोप लगाया कि पहले पुलिस बल की मौजूदगी में JCB चलाकर काम कराने का प्रयास किया गया था। देशराज ने स्पष्ट किया कि वे सरकारी काम में बाधा नहीं डालना चाहते, लेकिन अपनी निजी संपत्ति के अधिकारों और उचित मुआवजे के लिए आवाज उठाना उनका हक है।
मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने आश्वस्त किया कि जमीन, सीमांकन, नोटिस और पटवारी रिपोर्ट से जुड़ी सभी मांगों का नियमानुसार परीक्षण कराकर जल्द से जल्द समाधान निकाला जाएगा।
88 घंटे पानी में रहने से बिगड़ी तबीयत, संजय गांधी अस्पताल में भर्ती
लगातार 88 घंटे तक पानी के भीतर अनशन करने के कारण देशराज मिश्रा का स्वास्थ्य बिगड़ गया। धरना समाप्त होते ही प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के लिए संजय गांधी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य का परीक्षण कर रही है।
Jitu Patwari और कांग्रेस नेताओं ने उठाया था मुद्दा
स्वाधीनता दिवस (15 अगस्त) के मौके पर पानी में धरने पर बैठे युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने फोन पर देशराज से बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली थी। वहीं पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना भी धरना स्थल पहुंचे थे और प्रशासन को चेतावनी दी थी कि समाधान न निकलने पर सड़क पर आंदोलन किया जाएगा।
राजनीतिक हलचल और बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार रीवा कलेक्टर ने खुद मौके पर जाकर स्थिति को संभाला और अनशन समाप्त कराया।
