अस्ताना/नई दिल्ली
4 अरब डॉलर का समझौता, ऊर्जा और परमाणु ताकत में बड़ा बदलाव
दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम उत्पादक कजाकिस्तान के साथ भारत की ऐतिहासिक साझेदारी
2047 तक परमाणु ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगी मजबूती
अस्ताना/नई दिल्ली (BIG BREAKING): भारत और कजाकिस्तान के बीच यूरेनियम आपूर्ति को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक समझौता हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक बताई जा रही है। यह डील कजाकिस्तान की राष्ट्रीय यूरेनियम कंपनी काजाटोमप्रोम के साथ हुई है और इसे इस दशक की सबसे महत्वपूर्ण परमाणु ईंधन साझेदारियों में गिना जा रहा है।
92.9% वोट से मिली मंजूरी, असाधारण बैठक बुलाई गई
इस समझौते के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि काजाटोमप्रोम को इसे मंजूरी देने के लिए ‘असाधारण आम बैठक’ बुलानी पड़ी। कंपनी के 92.9 प्रतिशत शेयरधारकों ने इस डील के पक्ष में वोट किया, जो इसके वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
भारत को दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति सुनिश्चित
यह समझौता भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत ‘खरीद और भंडार निदेशालय’ के लिए प्राकृतिक यूरेनियम सांद्रण (U₃O₈) की लंबी अवधि की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। इससे भारत के परमाणु रिएक्टरों को कई वर्षों तक स्थिर ईंधन उपलब्ध रहेगा।
2047 के 100 GW लक्ष्य को मिलेगा बल
भारत ने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है। इस डील से उस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी, खासकर तब जब देश बढ़ती ऊर्जा मांग और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वैश्विक ऊर्जा संतुलन पर असर
कजाकिस्तान दुनिया के कुल यूरेनियम उत्पादन में लगभग 40–43% हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में भारत के साथ यह समझौता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक परमाणु ऊर्जा बाजार और शक्ति संतुलन पर भी असर डाल सकता है।
भारत की रणनीतिक सौदेबाजी होगी मजबूत
यूरेनियम की सुनिश्चित आपूर्ति मिलने से भारत की स्थिति पश्चिमी और रूसी परमाणु साझेदारों के साथ होने वाली भविष्य की वार्ताओं में मजबूत होगी। इससे नए रिएक्टरों की खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़े फैसलों में भारत को बढ़त मिलेगी।
हालांकि इस समझौते का कुल मूल्य सामने आ चुका है, लेकिन शिपमेंट की मात्रा, कीमत और डिलीवरी से जुड़ी विस्तृत जानकारी को गोपनीय रखा गया है। यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौतों में सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।
भारत-कजाकिस्तान यूरेनियम डील केवल ऊर्जा आपूर्ति का समझौता नहीं, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक स्वतंत्रता और वैश्विक परमाणु मंच पर उसकी स्थिति को मजबूत करने वाला बड़ा कदम है।
