शिवपुरी
जिले की राजनीति इन दिनों नए समीकरणों और बदले हुए नेतृत्व के दौर से गुजर रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद शिवपुरी का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। सिंधिया समर्थक कई प्रभावशाली नेता भाजपा में आ चुके हैं, जिससे भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक रूप से मजबूत नजर आ रही है। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को जिले में नए सिरे से संगठन खड़ा करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
इसी बीच युवा चेहरे के रूप में मोहित अग्रवाल को कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बनाए जाने को राजनीतिक दृष्टि से बड़ा दांव माना गया। पार्टी ने इस नियुक्ति के जरिए संगठन में नई ऊर्जा भरने का प्रयास किया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि शीर्ष नेतृत्व का पूरा भरोसा अभी उनके साथ मजबूती से खड़ा दिखाई नहीं देता।
सड़क से संगठन तक सक्रियता
जिला अध्यक्ष बनने के बाद मोहित अग्रवाल ने स्थानीय मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए। इससे प्रशासनिक स्तर पर कांग्रेस की मौजूदगी दर्ज कराई गई। लेकिन जमीनी स्तर पर पुराने दिग्गज नेताओं का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से संगठन विस्तार की राह आसान नहीं दिख रही।
बदला हुआ राजनीतिक पैटर्न
प्रदेश स्तर पर जीतू पटवारी के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में नई सक्रियता देखी जा रही है, किंतु शिवपुरी जिले में उसका प्रभाव सीमित नजर आ रहा है। जिले में अब राजनीति का स्वरूप भी बदल चुका है जहां पहले शीर्ष नेताओं के इर्द-गिर्द रणनीति तय होती थी, वहीं अब युवा और नए चेहरे ही सियासी गलियारों में अधिक सक्रिय हैं।
भाजपा का मजबूत नेटवर्क, कांग्रेस की चुनौती
जिले में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा मजबूत दिख रहा है। प्रशासनिक तंत्र पर भी सिंधिया समर्थक नेताओं का प्रभाव माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के सामने जनहित और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाकर अपनी साख मजबूत करने की चुनौती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मोहित अग्रवाल शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर लेते हैं, तो जिले की सियासत में कांग्रेस एक बार फिर मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकती है। फिलहाल, शिवपुरी की राजनीति नए चेहरों और नए समीकरणों के साथ करवट लेती दिखाई दे रही है।
