डबरा
“रामकथा प्रेम सिखाती है; राजनीति नहीं, लोकनीति से ही बनेगा रामराज्य”
डबरा के नवग्रह शक्ति पीठ प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन रविवार को विश्वविख्यात कवि और कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी प्रसिद्ध रामकथा “अपने-अपने राम” का शुभारंभ किया। उनके प्रवचन से पूरा पंडाल भक्ति, भाव और प्रेम से सराबोर हो उठा। कार्यक्रम में प्रदेश के कई गणमान्य नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। रामकथा का आयोजन 16 फरवरी तक चलेगा।
रामकथा जीवन का संस्कार, न कि केवल धार्मिक आयोजन
डॉ. कुमार विश्वास ने अपने प्रवचन की शुरुआत यह कहते हुए की कि “रामकथा प्रेम सिखाती है और इस प्रेम की शुरुआत परिवार से होती है।” उन्होंने कहा कि जब तक घर में संवाद और समझ नहीं होगी, तब तक समाज और विश्व में शांति की कल्पना अधूरी रहेगी।
उन्होंने श्रोताओं से कहा — “रामकथा कोई कथा नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है। राम हमें सिखाते हैं कि मर्यादा, त्याग और वचनपालन जीवन के सर्वोच्च मूल्य हैं।”
राम — मर्यादा, वचन और पारिवारिक प्रेम के आदर्श
कथा के दौरान डॉ. कुमार विश्वास ने भगवान श्रीराम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “राम का जीवन यह सिखाता है कि निजी सुख से ऊपर कर्तव्य, लोक और मर्यादा होती है।”
उन्होंने बताया कि पिता की आज्ञा, भ्रातृ प्रेम और दांपत्य मर्यादा आज के समाज के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी त्रेता युग में थीं।
“चलो अब लौट चले रघुराई” — सीता की करुण पुकार
भावनात्मक क्षण तब आया जब कुमार विश्वास ने माता सीता के शब्दों में कहा —
“चलो अब लौट चले रघुराई।”
इस प्रसंग में उन्होंने बताया कि यह क्षण प्रेम और करुणा से भरा है, परंतु भगवान श्रीराम के लिए लोकमर्यादा और पिता का वचन सर्वोपरि बन जाता है। उन्होंने कहा, “यही रामत्व है — जब व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठकर कर्तव्य निभाया जाए।”
राजनीति नहीं, लोकनीति से बनेगा रामराज्य
प्रवचन में डॉ. कुमार विश्वास ने रामराज्य की अवधारणा को आज की राजनीति से जोड़ते हुए कहा —
“लोकतंत्र और गणतंत्र में ‘लोक’ पीछे छूट गया है और ‘तंत्र’ आगे बढ़ गया है।”
उन्होंने कहा कि राजनीति का असली अर्थ लोकनीति होना चाहिए और नेता का अर्थ लोकसेवक।
“जब राजनीति राष्ट्रनीति से ऊपर नहीं जाएगी, तभी रामराज्य की अनुभूति संभव होगी।”
नवग्रह शक्ति पीठ में ग्रहों की कृपा, शनि देव की महिमा
डॉ. कुमार विश्वास ने नवग्रह शक्ति पीठ में स्थापित सभी नवग्रहों के महत्व और उनके मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति ग्रहदोष से पीड़ित है, वह यहां आकर नवग्रहों को नमन करे, अवश्य राहत पाएगा।
विशेष रूप से उन्होंने शनि देव का उल्लेख करते हुए बताया कि “पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करने से शनि के दुष्प्रभाव कम होते हैं।”
उन्होंने मंच से घोषणा की —
“जो शनि के कोप से पीड़ित हैं, वे डबरा आकर नवग्रह शक्ति पीठ में ‘ॐ शन शनिश्चराय नमः’ का जप करें, शनि देव की कृपा अवश्य प्राप्त होगी।”
“जो राम के अस्तित्व को नहीं मानता, वह अपना अस्तित्व खो देता है”
कथा के अंत में डॉ. कुमार विश्वास ने दृढ़ स्वर में कहा —
“जो कोई भी व्यक्ति राम के अस्तित्व को नहीं मानता, वह अपना अस्तित्व खो देता है।”
उन्होंने रामकथा के संदेश को दोहराया — “परिवार में प्रेम, समाज में शांति और विश्व में सद्भाव ही सच्चा रामराज्य है।”
पूरे प्रवचन के दौरान श्रोताओं ने हर प्रसंग पर भाव-विभोर होकर जय श्रीराम के उद्घोष लगाए।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति से गौरवान्वित हुआ डबरा
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, कैबिनेट मंत्री इंदर सिंह परमार, कैबिनेट मंत्री करण सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, पूर्व मंत्री सुरेश राठखेड़ा, पूर्व सांसद के.पी. यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर रावत सहित कई जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

सभी अतिथियों का स्वागत प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने किया।
